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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, गुरुग्राम से नूंह तक बिजली-पानी का संकट

October 23, 2026

गुरुग्राम। हरियाणा (Haryana) में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की 3 दिवसीय हड़ताल जारी है। गुरुग्राम, नूंह और फरीदाबाद (Gurugram, Nuh, and Faridabad) समेत कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कहीं 24 घंटे से ज्यादा समय से बिजली गुल है, तो कहीं पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है। इस बीच हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने दावा किया है कि हड़ताल खत्म कराने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ी है। कर्मचारी यूनियन के नेताओं के साथ शुक्रवार दोपहर 3 बजे पंचकूला में होने वाली बैठक शुरू हो चुकी है। सरकार को उम्मीद है कि जल्द समाधान निकल सकता है।

आखिर बिजली कर्मचारियों की हड़ताल क्यों हो रही है?
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की हड़ताल की मुख्य वजह गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला है। कर्मचारी बिजली निगम के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों और चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने 22 अक्टूबर की रात 10 बजे से तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल शुरू की है। यह हड़ताल 24 अक्टूबर तक चलने वाली है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन अनिश्चितकालीन हो सकता है।

निजी कंपनी को क्या जिम्मेदारी दी गई है?
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने 19 अक्टूबर को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जिलों में 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिया। इसके तहत निजी कंपनी मौजूदा बिजली वितरक के साथ-साथ बिजली सप्लाई कर सकेगी। इससे संबंधित क्षेत्रों के 8.3 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को भविष्य में बिजली सप्लायर चुनने का विकल्प मिलेगा। इनमें घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा किसान, दुकानदार, कार्यालय और औद्योगिक इकाइयां भी शामिल हैं। लाइसेंस के दायरे में गुरुग्राम सिटी, गुरुग्राम सब-अर्बन, मानेसर, सोहना और नूंह के इलाके शामिल हैं। नई वितरण व्यवस्था पांच साल में चरणबद्ध तरीके से विकसित की जाएगी। नूंह को पहले चरण में शामिल किया गया है। योजना के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027-28 से नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को बिजली मिलनी शुरू हो सकती है।


  • निजीकरण के फैसले पर सरकार और कर्मचारियों की क्या राय है?
    बिजली कर्मचारियों के विरोध के बीच ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा है कि सरकार खुद निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ है। उन्होंने गुरुवार को अंबाला में कहा था कि सरकार ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के सामने निजी कंपनी के आवेदन का विरोध किया था, लेकिन फैसला सरकार के पक्ष में नहीं आया। अब सरकार इस आदेश के खिलाफ अपील कर रही है और उस पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है। विज ने कर्मचारियों से हड़ताल छोड़कर सरकार का साथ देने की अपील की थी। विज का कहना था कि केंद्र का कानून किसी व्यक्ति या कंपनी को बिजली आपूर्ति के लिए आवेदन करने की अनुमति देता है। ऐसे में सरकार कानूनी तरीके से इस फैसले को चुनौती दे रही है और कर्मचारियों को भी केस तैयार करने में मदद करनी चाहिए। दूसरी ओर, कर्मचारी यूनियनों का आरोप है कि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया और वादे पूरे नहीं किए। कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी आश्वासन मिलने पर वे आंदोलन रोकते रहे, लेकिन इस बार वे निजीकरण का फैसला वापस लेने और लंबित मांगें पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

    अनिल विज ने और क्या कहा था? पंचकूला में बैठक शुरू
    हड़ताल खत्म कराने के लिए सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच बातचीत शुरू हो गई है। शुक्रवार को अनिल विज ने कहा कि उन्होंने कर्मचारी नेताओं से बात की है और समस्या का समाधान लगभग निकल आया है। उन्होंने दोहराया कि हड़ताल किसी विवाद को सुलझाने का सही तरीका नहीं है और बातचीत से रास्ता निकालना चाहिए। विज के मुताबिक, कर्मचारी नेताओं ने आदेश को रद्द कराने के लिए सरकार से धारा 108 लागू करने की मांग की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी इस बारे में बात की और कहा कि सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी। इसके बाद यूनियन नेताओं ने पंचकूला में दोपहर 3 बजे बैठक करने पर सहमति जताई। फिलहाल यह बैठक जारी है। विज ने भरोसा जताया है कि कुछ ही घंटों में हड़ताल खत्म हो सकती है। हालांकि, बैठक के नतीजे और हड़ताल खत्म होने की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

    गुरुग्राम में बिजली संकट, 12 घंटे में 3 हजार से ज्यादा शिकायतें
    हड़ताल का असर गुरुग्राम में साफ दिखाई देने लगा है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण कई इलाकों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हड़ताल शुरू होने के बाद महज 12 घंटे में बिजली निगम के पास 3,000 से ज्यादा शिकायतें पहुंचीं। इनमें रात के समय 945 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि सुबह केवल दो घंटे में 2,245 शिकायतें आ गईं। कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों का दावा है कि गुरुग्राम के करीब 40 प्रतिशत हिस्से में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों के मुताबिक, रात से बिजली लाइनों में आने वाली खराबियों को ठीक नहीं किया जा रहा है। बिजली गुल होने से घरों में पानी की किल्लत बढ़ी है। कई परिवारों को रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है और कुछ जगहों पर महिलाओं को टॉर्च की रोशनी में खाना बनाना पड़ रहा है। भीमगढ़ खेड़ी में बिजली गुल रहने से परेशान लोगों ने देर रात सड़क पर जाम लगा दिया था। हालांकि, बाद में जाम खुलवा दिया गया और बिजली सप्लाई बहाल कर दी गई। जिला प्रशासन ने लोगों की शिकायतें सुनने के लिए अस्थायी कॉल सेंटर भी शुरू किया है।


  • नूंह में 24 घंटे से ज्यादा समय से बिजली गुल
    नूंह जिले में भी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। यहां कई इलाकों में 24 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की खबर है। बिजली नहीं होने से एटीएम, साइबर कैफे, दूध की डेयरियों और बिजली पर निर्भर दूसरे कारोबारों का कामकाज प्रभावित हुआ है। दुकानदारों और आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में परेशानी हो रही है। लंबे समय तक बिजली गुल रहने से पेयजल संकट गहराने की आशंका भी बढ़ गई है। बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने पर पानी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे घरेलू जरूरतों के साथ-साथ कारोबार और दूसरे जरूरी कामों पर भी असर पड़ने की आशंका है। गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली वितरण व्यवस्था लागू करने के फैसले को लेकर कर्मचारियों का विरोध अब आम लोगों की परेशानी का कारण बन रहा है।

    बिजली संकट पर फरीदाबाद में भी लोगों का गुस्सा फूटा
    बिजली संकट का असर फरीदाबाद में भी देखने को मिल रहा है। शुक्रवार सुबह बल्लभगढ़ में स्थानीय लोग और कांग्रेस नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक मूलचंद शर्मा के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सवाल उठाया कि जब आम जनता बिजली संकट से जूझ रही है, तो जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में बिजली की स्थिति क्या है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उन्हें विधायक कार्यालय के अंदर जाकर बिजली आपूर्ति की स्थिति देखने दी जाए। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक वे कार्यालय में बिजली की वास्तविक स्थिति नहीं देख लेते, तब तक धरना खत्म नहीं करेंगे।

    नई बिजली व्यवस्था में क्या बदलाव होंगे?
    निजी कंपनी की प्रस्तावित योजना के तहत 2026-27 से 2030-31 के बीच 4,717 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना है। नई व्यवस्था में स्मार्ट मीटर, डिजिटल बिलिंग, बिजली वितरण प्रबंधन प्रणाली और शिकायतों का समाधान बेहतर बनाने से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है। प्रस्ताव के मुताबिक, बिजली की 80 प्रतिशत जरूरत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से और 20 प्रतिशत थर्मल बिजली से पूरी करने का लक्ष्य है। हालांकि, मौजूदा उपभोक्ताओं को तुरंत कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। वर्तमान बिजली वितरक पहले की तरह आपूर्ति जारी रखेगा। उपभोक्ताओं को नई कंपनी का नेटवर्क उनके क्षेत्र में पहुंचने के बाद सप्लायर बदलने का विकल्प मिलेगा। कंपनी को पहले चरण की विस्तृत कार्ययोजना और उपभोक्ताओं के सप्लायर बदलने की प्रक्रिया से जुड़ा प्रोटोकॉल 60 दिनों के भीतर आयोग को सौंपना होगा।

    अब आगे क्या हो सकता है?
    फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि सरकार और बिजली कर्मचारी यूनियनों के बीच पंचकूला में चल रही बैठक से क्या समाधान निकलता है। कर्मचारी निजीकरण का फैसला वापस लेने और लंबित मांगें पूरी करने पर जोर दे रहे हैं, जबकि सरकार कानूनी तरीके से नियामक आयोग के आदेश को चुनौती देने की बात कह रही है। कर्मचारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तो 24 अक्टूबर को संयुक्त संघर्ष समिति के साथ आगे की रणनीति तय की जाएगी और हड़ताल को अनिश्चितकालीन बनाया जा सकता है। इस पूरे विवाद में आम जनता को सबसे ज्यादा परेशानी बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित होने से हो रही है। यदि बातचीत सफल रहती है और कर्मचारी हड़ताल खत्म करते हैं, तो बिजली सेवाएं सामान्य करने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन बैठक बेनतीजा रहने पर गुरुग्राम, नूंह और फरीदाबाद समेत दूसरे प्रभावित इलाकों में संकट और बढ़ने की आशंका है। फिलहाल, सभी की नजर सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच जारी बातचीत पर है।

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