
नई दिल्ली। इटली (Italy) में विरोध प्रदर्शनों (Protest) के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Prime Minister Giorgia Meloni) की सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। मंगलवार को मंजूर किए गए नए सुरक्षा प्रावधानों के तहत प्रदर्शन के दौरान हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को पांच साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। वहीं, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल नाबालिगों के माता-पिता को भी नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी इटली के कई शहरों में हुई हिंसक घटनाओं के बाद सरकार ने ये फैसले लिए हैं। इनमें देश की आर्थिक राजधानी मिलान भी शामिल है, जहां युवाओं के समूहों ने दुकानों के शीशे तोड़े, लूटपाट की और पुलिस पर हमले किए। प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया पर नए कानून की जानकारी देते हुए कहा कि तोड़फोड़ और चोरी करना कोई क्रांतिकारी काम नहीं है। प्रदर्शन के नाम पर ऐसी गतिविधियों को अंजाम देना अपराध है।
5 साल की जेल और 20 हजार यूरो तक जुर्माने का प्रावधान
नए प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इनके तहत कम से कम पांच लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले व्यक्ति को पांच साल तक की जेल और अधिकतम 20 हजार यूरो का जुर्माना हो सकता है। यदि प्रदर्शन के दौरान किसी ने अपना चेहरा ढका हो या किसी व्यक्ति को चोट पहुंची हो, तो सजा और बढ़ाई जा सकती है।
सरकार ने अधिकारियों को तोड़फोड़ से हुए नुकसान की तत्काल भरपाई का आदेश देने का अधिकार भी दिया है। इसका उद्देश्य हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को होने वाले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना है।
नाबालिगों की हरकतों के लिए माता-पिता भी होंगे जिम्मेदार
नए कानून में नाबालिगों की हिंसक गतिविधियों को लेकर भी सख्ती की गई है। यदि कोई नाबालिग तोड़फोड़ या लूटपाट में शामिल पाया जाता है, तो उसके माता-पिता को नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
इसके अलावा, पुलिस को 14 से 17 साल की उम्र के उन किशोरों को भी हिरासत में लेने की अनुमति दी गई है, जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, लेकिन उनके खतरनाक होने के सबूत मौजूद हैं। इससे पहले इस तरह की कार्रवाई का अधिकार केवल वयस्कों के मामले में लागू होता था।
मिलान में 2026 के अंत तक तैनात होंगे 500 सैनिक
सरकार को शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान एक बार फिर हिंसा भड़कने की आशंका है। इसे देखते हुए मिलान में 2026 के अंत तक पुलिस की मदद के लिए 500 सैनिक तैनात किए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैनिक महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद करेंगे। यह तैनाती संभावित हिंसा को रोकने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा है।
सत्ता में आने के बाद से सुरक्षा पर सख्त रुख
प्रधानमंत्री मेलोनी की सरकार वर्ष 2022 में सत्ता में आने के बाद से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर कई कड़े फैसले ले चुकी है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि कठोर कानूनों से अपराध और हिंसा के पीछे मौजूद मूल समस्याओं का समाधान नहीं होता। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में इटली की जेलों में कैदियों की संख्या 17 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।
महंगाई और डीजल की कीमतों पर भी विरोध
इटली में सुरक्षा को लेकर सख्ती के बीच आर्थिक मुद्दों पर भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दक्षिणी इटली में बढ़ती महंगाई और डीजल की कीमतों के खिलाफ ट्रक ड्राइवर प्रदर्शन कर रहे हैं। सड़कों पर जाम और रास्ते रोके जाने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
इसका असर खाद्य उद्योग और कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। कुछ पास्ता कंपनियों को उत्पादन रोकना पड़ा है, जबकि कृषि संगठनों ने फल और सब्जियां खराब होने की आशंका जताई है। सरकार ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों को नई सहायता देने का भरोसा दिया है।
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