
बर्दवान। पश्चिम बंगाल का बर्दवान जिला अदालत परिसर एक बार फिर चर्चा में है। शनिवार की सुबह अदालत परिसर के भीतर एक कथित “फर्जी वकील” के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों ने पूरे प्रशासनिक और कानूनी हलके में भारी हड़कंप मचा दिया। आरोपी का नाम निलय चोंगदार बताया जा रहा है, जो लंबे समय से बर्दवान अदालत में वकील के रूप में काम करते आ रहे थे। लेकिन अब उनकी योग्यता और सदस्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सुबह अदालत परिसर के वाहन और साइकिल स्टैंड के पीछे अचानक दो अलग-अलग पोस्टर लगे मिले, जिनमें निलय चोंगदार पर बिना विधि परीक्षा पास किए वकालत करने का आरोप लगाया गया है। पोस्टरों में यह भी पूछा गया कि बिना बार की सदस्यता के वह किसके संरक्षण में वर्षों से काम कर रहे थे। घटना सामने आते ही वकीलों के बीच हड़कंप मच गया और बार एसोसिएशन ने तुरंत जांच शुरू कर दी।
बर्दवान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरूप दास ने बताया कि हाल ही में एक बैठक के दौरान आऊशग्राम से प्राप्त एक पत्र के आधार पर संबंधित व्यक्ति के दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि निलय चोंगदार ने अब तक All India Bar Examination पास नहीं किया है। नियमों के अनुसार उनकी सदस्यता अभी “पेंडिंग” स्थिति में है और उन्हें औपचारिक रूप से बार का सदस्य नहीं माना गया है। बंगाल बार एसोसिएशन ने उनके सभी दस्तावेज बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजने का निर्णय लिया है। साथ ही जिला जज को भी इसकी जानकारी दी जाएगी।
बार एसोसिएशन के सह-सभापति संजय घोष ने स्पष्ट किया कि निलय चोंगदार इस समय बार के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। एसोसिएशन ने कहा कि कानूनी प्रशिक्षण लेना अलग बात है, लेकिन पूरी तरह वकालत करने के लिए सभी परीक्षाएं और नियमों का पालन अनिवार्य है। जल्द ही बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति और सामान्य सदस्यों की आपात बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इस मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
घटना के बाद लगे हुए पोस्टर फाड़ दिए गए, लेकिन यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि पोस्टर किसने लगाए और किसने हटाए। इस घटना को लेकर अदालत परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है।
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