कानपुर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) अपनी संगठनात्मक संरचना में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। संघ के शताब्दी वर्ष (The Sangh’s Centenary Year) को ध्यान में रखते हुए प्रांत और क्षेत्र स्तर की इकाइयों को नए स्वरूप में ढालने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित बदलाव के तहत प्रांत को अब “संभाग” और क्षेत्र इकाई को “राज्य इकाई” के रूप में पुनर्गठित किया जा सकता है।
यह निर्णय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद घोषित होने की संभावना है, जो हरियााणा में आयोजित हो रही है।
नई संरचना लागू होने के बाद प्रांत प्रचारक और क्षेत्र प्रचारक जैसे पदनामों में भी परिवर्तन किया जाएगा। उनकी जगह अब संभाग प्रचारक और राज्य प्रचारक जैसे पद होंगे।
उदाहरण के तौर पर मौजूदा कानपुर प्रांत, जिसमें झांसी तक का क्षेत्र शामिल है, उसे दो हिस्सों में बांटकर कानपुर संभाग और झांसी संभाग बनाया जा सकता है। झांसी संभाग में बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों को शामिल करने की योजना है।
फिलहाल संगठन में पूर्वी क्षेत्र, पश्चिमी क्षेत्र और उत्तराखंड क्षेत्र जैसी तीन इकाइयां हैं। प्रस्तावित बदलाव के बाद इन तीनों को मिलाकर एक राज्य इकाई बनाई जा सकती है, जिसका नेतृत्व राज्य प्रचारक करेंगे।
संघ सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान दो दिन तक विभिन्न सत्रों में पदाधिकारियों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद 15 मार्च को राष्ट्रीय स्तर पर पदों और जिम्मेदारियों में संभावित बदलाव की घोषणा की जा सकती है।
संघ की संगठनात्मक संरचना में यह बदलाव लंबे समय बाद किया जा रहा है। इसे शताब्दी वर्ष के अभियान के तहत संगठन को और विस्तार देने और अधिक लोगों को जोड़ने की रणनीति माना जा रहा है।
कुछ महीने पहले कानपुर दौरे पर आए संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने भी पदाधिकारियों को संभावित बदलाव के लिए तैयार रहने का संकेत दिया था।
इस बीच भाजपा की जिला इकाइयों में भी बदलाव की प्रक्रिया जारी है। जिला पर्यवेक्षकों ने अपनी-अपनी कार्यकारिणी के प्रस्तावित नाम प्रदेश संगठन को सौंप दिए हैं। माना जा रहा है कि संघ की बैठक के बाद ही भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी की सूची भी जारी की जा सकती है।
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