लाहौर/रावलकोट। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन मंगलवार को और तेज हो गया। रावलकोट (Rawalakot) के ईदगाह मैदान में जुटे प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद (Islamabad)की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दावा किया कि यह क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि खाद्यान्न और जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित रही तो स्थानीय लोग अपने हितों की रक्षा के लिए दूसरे विकल्प तलाशने को मजबूर होंगे।
प्रदर्शन के दौरान जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं ने पाकिस्तान सरकार पर नागरिकों को सामूहिक रूप से दंडित करने का आरोप लगाया। संगठन के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि स्थानीय लोगों को पाकिस्तान की मदद की जरूरत नहीं, बल्कि सरकार को क्षेत्र के लोगों की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोककर आम नागरिकों पर दबाव बनाया जा रहा है।
पीओके के विभिन्न इलाकों में यह आंदोलन कई दिनों से जारी है। जेएएसी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी सस्ती बिजली, खाद्यान्न, स्वच्छ पानी, बेहतर सड़कें, रोजगार के अवसर और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने इस महीने की शुरुआत में संगठन पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाया था, लेकिन इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी है।
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान के बाद और बढ़ गया, जिसमें उन्होंने रावलकोट और मीरपुर के लोगों को “वास्तविक कश्मीरी नहीं” बताया था। इस टिप्पणी के बाद क्षेत्र में विरोध तेज होने का दावा किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए खाद्यान्न, ईंधन और दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित की जा रही है। उनका कहना है कि स्थानीय बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की कमी से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जेएएसी के नेता सरदार अमन खान समेत संगठन के कई पदाधिकारियों पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने के उद्देश्य से की जा रही है।
आंदोलन के बीच जून की शुरुआत से पीओके के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट और सोशल मीडिया सेवाएं बाधित रहने की खबरें हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसका उद्देश्य आंदोलन से जुड़ी जानकारी और तस्वीरों को बाहर जाने से रोकना है।
स्थानीय दावों के अनुसार, लगभग दो सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। कई क्षेत्रों में कर्फ्यू जैसे हालात बताए जा रहे हैं और आवश्यक वस्तुओं की कमी से जनजीवन प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
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