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प्रोटोकॉल विवाद: राष्ट्रपति के सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम पर सियासी पारा चढ़ा

June 20, 2026

  • विपक्ष ने जनप्रतिनिधियों की अनदेखी को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया

जबलपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर जबलपुर में आयोजित होने जा रहे 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम से पहले एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के मुख्य आतिथ्य में 21 जून 2026 को प्रात: 6.00 बजे गैरिसन ग्राउंड, जबलपुर में यह आयोजन हो रहा है। मध्य प्रदेश शासन के आयुष विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जारी निमंत्रण पत्र में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष विभाग मंत्री इंदर सिंह परमार तथा सांसद आशीष दुबे के नाम तो शामिल हैं, लेकिन राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि, राज्यसभा सांसद विवेक तंखा और शहर के प्रथम नागरिक महापौर जगत बहादुर सिंह का नाम गायब होने से शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।


  • आमंत्रण पत्र पर छिड़ी नई सियासी बहस
    जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए इस शासकीय आमंत्रण पत्र ने शहर के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कार्यक्रम की गरिमामयी उपस्थिति वाली सूची में कई प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल न होने के कारण विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं की पूरी तरह अनदेखा करने का मामला बताया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने जानबूझकर कुछ महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों के नामों को सूची से बाहर रखा है, जो कि प्रोटोकॉल के खिलाफ है।

    प्रोटोकॉल को लेकर पूर्व में भी बने विवाद के हालात
    जबलपुर में शासकीय कार्यक्रमों के दौरान प्रोटोकॉल की अनदेखी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का जबलपुर आगमन हुआ था, तब महापौर को अपेक्षित प्रोटोकॉल नहीं मिलने का मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उस समय महापौर कांग्रेस में थे, जबकि अब वे भाजपा में शामिल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर उन्हें उचित स्थान नहीं मिलना चर्चा का विषय बना हुआ है।

    प्रशासनिक सफाई और विपक्ष की तीखी आपत्ति
    इस पूरे मामले में राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीकि ने राज्य सरकार के समक्ष अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। दूसरी ओर, प्रशासनिक हलकों से जुड़े अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक औपचारिक सूची का सामान्य मामला बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 21 जून को होने वाले मुख्य आयोजन से पहले नाम गायब होने का यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और इसने उत्सव से पहले राजनीतिक खिंचाव को काफी बढ़ा दिया है।

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