
नई दिल्ली। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला (South American country Venezuela) बुधवार को भूकंप (Earthquake) की भीषण तबाही से दहल उठा. कुछ ही मिनटों के फर्क पर आए दो ताकतवर भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी. अब तक वहां कम से कम 235 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,500 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं. इन जलजलों की वजह से वहां बड़ी संख्या में इमारतें जमींदोज हो गई हैं और मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिशें लगातार जारी है. ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार पहला भूकंप 7.2 और दूसरा 7.5 तीव्रता का था. विशेषज्ञों का कहना है कि यह वेनेजुएला में पिछले 100 साल से भी अधिक समय में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप है. प्रभावित इलाकों में सेना, राहत एजेंसियां और स्वयंसेवी संगठन युद्धस्तर पर बचाव कार्य में जुटे हैं।
वेनेजुएला की इस त्रासदी के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा है कि क्या भूकंप आने से पहले लोगों को चेतावनी दी जा सकती है? और अगर भारत (India) में ऐसा बड़ा भूकंप आए तो क्या हमारे पास ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद है?
दरअसल भारत के भूवैज्ञानिक हिमालयी क्षेत्र में बेहद भीषण भूकंप की चेतावनी देते रहे हैं. हिमालय पर्वत शृंखला भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलने से बना था और इसे धरती के भीतर की प्लेटों में होने वाली हलचल का खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।
भूवैज्ञानिकों ने भूकंप संभावित क्षेत्रों को पांच सीस्मिक ज़ोन में बांटा हुआ है. जोन-1 में भूकंप आने की आशंका सबसे कम रहती है, वहीं जोन-5 में ज़्यादा प्रबल रहती है. दिल्ली-एनसीआर का इलाका सीस्मिक जोन-4 में आता है और यही वजह है कि यहां भीषण भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है. ऐसे में उनकी आशंका है कि यहां 9.0 तक तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है, जिससे राजधानी दिल्ली तक तबाही मच सकती है।
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