
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने शनिवार को महाराष्ट्र (Maharashtra) के शिर्डी में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले 25 से 30 वर्षों में भारत (India) को दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक (Arms Exporter) बनने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। गोला-बारूद निर्माण यूनिट के उद्घाटन के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब उस दौर में पहुंच चुका है, जहां वह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
निजी क्षेत्र की भूमिका पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अब निजी कंपनियां केवल सपोर्टिंग रोल में नहीं हैं, बल्कि अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब सरकार की दूरदृष्टि और निजी क्षेत्र का नवाचार साथ आता है, तो देश नई ऊंचाइयों को छूता है।
भविष्य के युद्धों पर सीडीएस का बयान
इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भी आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध बहु-क्षेत्रीय होंगे, जिनमें जमीन, समुद्र, हवा के साथ-साथ साइबर और मनोवैज्ञानिक क्षेत्र भी शामिल होंगे।
टेक्नोलॉजी बनेगी निर्णायक शक्ति
जनरल चौहान ने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों पर आधारित नहीं होंगे, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स, साइबर सिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी और सूचना प्रभुत्व जैसे तत्व निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि जो देश तेजी से नवाचार करेगा, उत्पादन क्षमता बढ़ाएगा और तकनीक के साथ खुद को ढालेगा, वही रणनीतिक बढ़त हासिल करेगा।
भारत की रक्षा नीति में बदलाव
कार्यक्रम में यह संकेत भी दिया गया कि भारत अब रक्षा उत्पादन और निर्यात को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का फोकस घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने पर है।
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