
इन्दौर। ट्रेनों में यात्रियों को साफ-सफाई और सुरक्षित सफर देने के रेलवे के दावों की पोल रोज खुलती जा रही है। देश के सबसे साफ शहर इंदौर से जुड़ी अलग-अलग ट्रेनों में यात्रियों ने कोच में कॉकरोच और चूहों की मौजूदगी, गंदे चादर-तकिए, खराब टॉयलेट और आरक्षित सीटों पर अनधिकृत कब्जे की शिकायत की। सबसे गंभीर बात यह रही कि यात्रियों की समस्या का समाधान किए बिना ही शिकायतों को बंद कर दिया गया।
गांधीनगर से इंदौर आने वाली शांति एक्सप्रेस (19309) के बी-5 कोच में सफर कर रहे यात्री ने रेलवे को टैग करते हुए शिकायत की कि कोच में कॉकरोच और चूहे घूम रहे हैं। यात्री ने सीट नंबर 25, 26, 28 और 29 के आसपास की स्थिति का फोटो भी पोस्ट किया। शिकायत में चादर और तकियों के बेहद गंदे और अस्वच्छ की भी बात कही। यात्री ने शिकायत करने के कुछ समय बाद कहा कि बिना समाधान किए उनकी शिकायत की क्लोज कर दिया गया है।
शिकायत बंद, कॉकरोच फिर भी घूमते रहे
इसी तरह कामाख्या एक्सप्रेस (19306) के एसी कोच बी-4 में यात्री ने कॉकरोच की शिकायत की। यात्री ने लिखा कि कोच में कॉकरोच घूम रहे हैं, टॉयलेट का फ्लश काम नहीं कर रहा और शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। रेलवे की ओर से जवाब में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए सूचना देने की बात कही गई, लेकिन बाद में यात्री को बताया गया कि समय की कमी के कारण शिकायत ऑनलाइन बंद की जा रही है और समस्या का समाधान ऑफलाइन किया जाएगा। यात्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए लगातार शिकायत की कि 12 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आरक्षित कोच में सामान्य यात्रियों का कब्जा
हैदराबाद-इंदौर हमसफर एक्सप्रेस (20915) में भी आरक्षण व्यवस्था को लेकर यात्री ने शिकायत की। यात्री के मुताबिक ट्रेन में आरक्षित द्वितीय श्रेणी का कोच सामान्य यात्रियों से भरा था और बाहर से कोच की पहचान के लिए कोच नंबर भी साफ नहीं था। यात्रियों को अपनी आरक्षित सीटों पर बैठने में परेशानी हुई। रेलवे ने इस शिकायत को भी संबंधित टीम तक पहुंचाने की जानकारी देते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
सैकड़ों शिकायतें रोज, समाधान कब?
पिछले कुछ समय से रतलाम मंडल और खासतौर पर इंदौर से जुड़ी ट्रेनों में यात्रियों द्वारा रोजाना सैकड़ों शिकायतें की जा रही है। इनमें मुख्य रूप से सामान्य से लेकर एसी कोच तक में चूहे, कॉकरोच, गंदे चादर, कोच और टायलेट में गंदगी, वॉशरूम में पानी की कमी, आरक्षित डिब्बों में सामान्य यात्रियों का प्रवेश जैसी शिकायतें शामिल है। रोजाना आ रही इतनी शिकायतों के बावजूद इनके स्थाई समाधान के बजाय जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। सवाल यह है कि ट्रेनों में यात्री सुविधा का स्तर कब सुधरेगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी।
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