
इंदौर। इंदौर शहर में सायबर अपराधों में अंकुश लगाने और फर्जी सिम कार्ड गिरोहों का पर्दाफाश करने में क्राइम ब्रांच इंदौर ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बिना ग्राहकों की सहमति के सिम एक्टिवेट करने और उन्हें साइबर ठगों को उपलब्ध कराने वाले एक शातिर सिम विक्रेता को गिरफ्तार किया है। आरोपी द्वारा चालू की गई फर्जी सिम के जरिए उत्तर प्रदेश में 16.60 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है। पकड़ा गया आरोपी धर्मेंद्र से पुलिस 30 सिम का डाटा रिकवर किया है।
गृह मंत्रालय, भारत सरकार के इंडियन कोऑर्डिनेशन सेंटर आई-4सी और राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, भोपाल से संदिग्ध सिम यूजर और फर्जी तरीके से सिम चालू करने वाले पीओएस एजेंटों की एक सूची प्राप्त हुई थी। सूची के सत्यापन और तकनीकी जांच के दौरान इंदौर के दुधिया क्षेत्र स्थित ‘धर्मेंद्र मोबाइल साइबर क्राइम
शॉप’ के संचालक पीओएस एजेंट धर्मेंद्र अहिरवार की भूमिका संदिग्ध पाई गई। क्राइम ब्रांच की टीम ने जब मौजूद साइबर शिकायतों से मिलान किया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा आरोपी धर्मेंद्र अहिरवार एक्टिवेट की गई एक द्वारा बेची गई संदिग्ध सिमों का डेटा खंगाला संदिग्ध सिम के खिलाफ उत्तर प्रदेश में साइबर और एनसीआरपी पोर्टल पर फ्रॉड की 2 अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गई थी, जिनमें ठगों ने पीड़ितों से कुल 16,60,991 रुपये की बड़ी धोखाधड़ी की थी। आरोपी धर्मेंद्र ग्राहकों से प्राप्त दस्तावेजों का अनुचित लाभउठाकर उनके नाम पर कई अन्य फर्जी सिम भी चालू कर चुका था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने कई अन्य सिम कार्ड भी इसी तरह फर्जी तरीके से एक्टिवेट कर साइबर अपराधियों तक पहुंचाए थे, जिनका इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में ऑनलाइन ठगी के लिए किया गया था। क्राइम ब्रांच इंदौर ने आरोपी धर्मेंद्र अहिरवार पिता रोडेलाल अहिरवार, निवासी हाल शिवकंड नगर बाणगंगा इंदौर, स्थायी निवासी ग्राम मोतीपुर जिला गुना को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर फर्जी सिम नेटवर्क और बैंक खातों से जुड़े अन्य नेटवर्क की जांच की जा रही है।
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