
नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi)में अफगानिस्तान (Afghanistan)के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले (T20 match)में संजू सैमसन(Sanju Samson) ने बल्ले से शानदार वापसी की। उन्होंने महज 22 गेंदों में 57 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। लंबे समय से अपनी बल्लेबाजी को लेकर चर्चा में रहे संजू के लिए यह पारी खास रही। हालांकि मैच के बाद उन्होंने सिर्फ अपनी बल्लेबाजी को लेकर बात नहीं की बल्कि आलोचना और सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं के असर को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी।
संजू ने माना कि क्रिकेटरों को लेकर लगातार होने वाली चर्चाएं और आलोचनाएं खिलाड़ी को प्रभावित करती हैं। उनका कहना था कि अनुभव के साथ उन्होंने ऐसी परिस्थितियों से निपटना जरूर सीखा है लेकिन वह भी इंसान हैं। लगातार सामने आने वाली बातों का असर होना स्वाभाविक है। उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि वह कई बार खुद को बाहरी शोर से दूर रखने की कोशिश करते हैं लेकिन कभी कभी सोशल मीडिया या दूसरी जगहों पर सामने आने वाली टिप्पणियां नजर आ ही जाती हैं।
संजू ने बताया कि वह खुद को बाहरी शोर से दूर रखने के लिए वाईफाई बंद करने जैसी कोशिश करते हैं लेकिन कई बार वह दोबारा चालू हो जाता है और कुछ कमेंट सामने आ जाते हैं। उनके मुताबिक ऐसी चीजें मन को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि उनका फोकस इस बात पर रहता है कि मैदान पर उतरते समय उनका माइंडसेट साफ रहे और वह अपनी तैयारी तथा खेल पर ध्यान दें।
उन्होंने साफ किया कि अगर वह बाहर की बातों को अपने खेल पर हावी होने देंगे तो गेंदबाजी के खिलाफ खुलकर बल्लेबाजी करना मुश्किल हो जाएगा। उनके अनुसार बल्लेबाज को हर गेंद पर सोच समझकर खेलना होता है और ज्यादा सोचने से स्वाभाविक खेल प्रभावित हो सकता है। इसलिए वह कोशिश करते हैं कि मैदान पर अपना ध्यान सिर्फ खेल और टीम की जरूरत पर रखें।
इसी बातचीत के दौरान संजू सैमसन ने 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी अपनी राय रखी। वैभव ने हाल के मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया है और उनके प्रदर्शन ने भारतीय टीम में जगह बनाने की दावेदारी मजबूत की है। संजू ने माना कि वैभव के प्रदर्शन को देखते हुए उसे टीम में मौका मिलना स्वाभाविक था।
संजू ने कहा कि भारतीय टीम को संभालना आसान काम नहीं है। एक तरफ अनुभवी खिलाड़ी होते हैं तो दूसरी तरफ युवा खिलाड़ियों का शानदार फॉर्म भी चयन के फैसले को प्रभावित करता है। उन्होंने वैभव के करीब 700 से 800 रन बनाने वाले प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे प्रदर्शन के बाद युवा खिलाड़ी को मौका देना टीम मैनेजमेंट के लिए समझ में आने वाला फैसला है।
संजू ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने हाल के दो तीन मुकाबलों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया था जबकि वैभव अच्छी फॉर्म में थे। ऐसे में नेतृत्व समूह के सामने टीम के हित को देखते हुए फैसला लेने की स्थिति बनी। संजू ने इस फैसले को शिकायत की नजर से देखने के बजाय टीम मैनेजमेंट की मजबूरी और जिम्मेदारी को समझने की बात कही।
उन्होंने हेड कोच गौतम गंभीर के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। संजू के मुताबिक सीरीज के दौरान इस मुद्दे पर टीम के भीतर बातचीत हुई थी और सीरीज शुरू होने से पहले भी गंभीर ने उनसे काफी बात की थी। उनके अनुसार ऐसे मामलों में स्पष्ट संवाद बेहद जरूरी होता है।
संजू ने कहा कि लोकप्रिय फैसला लेना आसान होता है लेकिन टीम के हित में कठिन फैसला लेना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने नेतृत्व समूह की तारीफ करते हुए कहा कि टीम को सबसे आगे रखते हुए मुश्किल फैसले लिए जा रहे हैं। उनका बयान यह दिखाता है कि चयन की प्रतिस्पर्धा के बीच खिलाड़ी के लिए टीम का लक्ष्य और आपसी संवाद कितना महत्वपूर्ण है।
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