
नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में शनि (Saturn) को कर्मों का फल देने वाला ग्रह माना जाता है। यह ग्रह सबसे धीमी गति से चलता है और एक राशि में करीब ढाई साल तक रहता है, इसलिए इसका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई देता है। वर्तमान में शनि मीन राशि (Pisces) में स्थित हैं और 2 जून 2027 तक यहीं रहेंगे। इस दौरान शनि कभी वक्री, कभी मार्गी और कभी अस्त-उदय की अवस्था में दिखाई देंगे।
द्रिक पंचांग के अनुसार, 13 मार्च 2026, शुक्रवार को शाम 7 बजकर 13 मिनट पर शनि मीन राशि में अस्त हो जाएंगे। शनि अस्त होने के बाद उनके कठोर प्रभाव कुछ हद तक कम हो जाते हैं। लगभग 40 दिनों तक शनि अस्त रहने के बाद 22 अप्रैल 2026, बुधवार को सुबह 4 बजकर 49 मिनट पर दोबारा उदित होंगे। इस दौरान कुछ राशियों को राहत और लाभ मिलने की संभावना है।
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए शनि का अस्त होना राहत देने वाला रहेगा। आपकी कुंडली के बारहवें भाव में शनि अस्त होंगे, जहां पहले से साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। इस समय खर्चों पर नियंत्रण आ सकता है और आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है। स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में भी राहत मिलने के संकेत हैं। विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े कामों में सफलता मिल सकती है। लंबे समय से अटके कामों में प्रगति होने की संभावना है, लेकिन कार्यस्थल पर विवादों से दूर रहना और सतर्क रहना जरूरी होगा।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय कई मामलों में फायदेमंद रह सकता है। शनि आपके पांचवें भाव में अस्त होंगे, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए काम दोबारा शुरू हो सकते हैं। नौकरी और व्यवसाय में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। प्रमोशन या नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है। व्यापार में नए ऑर्डर या डील मिलने के योग हैं। हालांकि पढ़ाई और संतान से जुड़ी चिंताएं बढ़ सकती हैं, इसलिए इस क्षेत्र में सावधानी बरतें और खर्चों पर ध्यान दें।
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए शनि का अस्त होना मिलाजुला असर देगा, लेकिन कुल मिलाकर लाभ के संकेत हैं। शनि आपके दूसरे भाव में अस्त होंगे और साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इस दौरान आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं और मेहनत का फल मिल सकता है। नौकरी में काम की सराहना हो सकती है और संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ संभव है। हालांकि इस समय बोलचाल में सख्ती आ सकती है, जिससे रिश्तों में तनाव पैदा हो सकता है। इसलिए सोच-समझकर बोलना और खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है।
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