
नई दिल्ली । टीवी अभिनेत्री(TV actress) शिवांगी जोशी(Shivangi Joshi) ने रियलिटी शो (reality show)लॉक अप 2(Lock Upp 2) में अपनी जिंदगी का ऐसा दर्द साझा किया जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो गया। आमतौर पर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चुप रहने वाली अभिनेत्री ने पहली बार बताया कि बचपन में वह यौन शोषण की कोशिश का शिकार हुई थीं। उन्होंने कहा कि यह घटना ऐसे व्यक्ति से जुड़ी थी जिसे वह परिवार का सदस्य मानती थीं और मामा जी कहकर बुलाती थीं। इस वजह से उनके लिए उस समय यह समझ पाना बेहद मुश्किल था कि उनके साथ जो हो रहा है वह गलत है।
शिवांगी ने बताया कि यह घटना उस समय की है जब वह अभिनय के क्षेत्र में आने की तैयारी कर रही थीं। मां के मुंहबोले भाई ने उन्हें यह कहकर अपने पास बुलाया कि अगर मुंबई जाकर अभिनेत्री बनना है तो अभिनय की तैयारी करनी होगी। इसी बहाने उन्होंने अभिनेत्री के साथ अनुचित व्यवहार किया। शिवांगी ने कहा कि शुरुआत में उन्हें कुछ समझ नहीं आया लेकिन कुछ समय बाद उन्हें असहज महसूस होने लगा और उन्होंने खुद को वहां से अलग कर लिया।
अभिनेत्री ने शो में एक और घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक दिन जब उनके माता पिता घर पर नहीं थे तब एक अन्य व्यक्ति उनके घर आया। उसने उन्हें समझाने के बहाने पास बुलाया और फिल्म इंडस्ट्री का हवाला देते हुए अनुचित बातें करने लगा। उसने कहा कि अभिनय की दुनिया में ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है और इसी बहाने उनके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की।
शिवांगी ने बताया कि जैसे ही उस व्यक्ति ने उन्हें पकड़ने और किस करने की कोशिश की उन्होंने तुरंत उसे धक्का दे दिया। इसके बाद वह व्यक्ति गुस्से में आ गया और उन्हें नीचे गिरा दिया। सौभाग्य से उसी समय उनके माता पिता घर लौट आए और पूरी घटना देखकर उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति को घर से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद परिवार ने उनका पूरा साथ दिया और उन्हें हर तरह का भावनात्मक सहारा दिया।
अभिनेत्री ने कहा कि इन घटनाओं का असर उनके बचपन और मानसिक स्थिति पर लंबे समय तक रहा। वह कई दिनों तक स्कूल भी नहीं जा सकीं और लोगों पर भरोसा करने में कठिनाई महसूस करने लगीं। हालांकि परिवार के सहयोग और समय के साथ उन्होंने खुद को संभाला और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ती रहीं।
शिवांगी ने यह भी कहा कि वह इस अनुभव को साझा इसलिए कर रही हैं ताकि ऐसे लोग जो किसी तरह के शोषण का सामना कर चुके हैं वे खुद को अकेला न समझें। उन्होंने माना कि चुप रहने से समस्या खत्म नहीं होती बल्कि सही समय पर आवाज उठाना और भरोसेमंद लोगों से मदद लेना बेहद जरूरी होता है।
उनके इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनका समर्थन किया। कई प्रशंसकों ने उनकी हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की बातें सामने आने से समाज में जागरूकता बढ़ती है और पीड़ितों को अपनी बात कहने का साहस मिलता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बच्चों को गुड टच और बैड टच की जानकारी देना परिवार और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी है ताकि वे किसी भी गलत व्यवहार को पहचान सकें और समय रहते अपने अभिभावकों को बता सकें।
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