
नई दिल्ली ।चांदी (Silver) की कीमतों को लेकर आने वाले समय के लिए तेजी का अनुमान सामने आया है। एक ताजा सिल्वर रिपोर्ट (Silver Report) में वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मांग (Industrial Demand) बढ़ने और खदानों से सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले छह महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market )में चांदी की कीमत 85 से 90 डॉलर (doler)प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
फिलहाल कॉमेक्स पर चांदी का भाव करीब 65 डॉलर प्रति औंस के आसपास बताया गया है। ऐसे में अनुमान के मुताबिक आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट में दिवाली 2027 तक चांदी के अंतरराष्ट्रीय भाव के 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
घरेलू बाजार के लिए भी इसी आधार पर तेजी का अनुमान लगाया गया है। सितंबर 2026 में करीब 2.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बेंचमार्क भाव को आधार मानते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये-डॉलर की चाल, आयात शुल्क और प्रीमियम को ध्यान में रखने पर घरेलू बाजार में चांदी की कीमत चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर से करीब 71 फीसदी की संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है।
रिपोर्ट में चांदी की संभावित तेजी के पीछे औद्योगिक मांग और आपूर्ति से जुड़े कई कारण बताए गए हैं। इसमें कहा गया है कि चांदी की कीमतों पर केवल बाजार की धारणा का असर नहीं है, बल्कि औद्योगिक जरूरतों और उपलब्धता के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वैश्विक चांदी बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच लगातार अंतर बना हुआ है। वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग और आपूर्ति के बीच 4.63 करोड़ औंस का घाटा रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह लगातार छठा वर्ष होगा जब वैश्विक बाजार में चांदी की कमी बनी रहेगी।
चांदी की कीमतों में तेजी के बावजूद खदानों से इसका उत्पादन तेजी से बढ़ाना आसान नहीं है। वर्ष 2026 में चांदी का कुल उत्पादन घटकर 84.41 करोड़ औंस रहने का अनुमान लगाया गया है। उत्पादन बढ़ाने में एक बड़ी चुनौती यह है कि चांदी के कुल उत्पादन का केवल करीब एक-चौथाई हिस्सा प्राथमिक चांदी की खदानों से आता है।
बाकी चांदी तांबा, जस्ता और सीसा जैसी धातुओं के खनन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। इस वजह से चांदी की कीमत बढ़ने के बावजूद इसके उत्पादन में तत्काल और तेज वृद्धि करना मुश्किल माना जा रहा है।
रिपोर्ट में औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी को भी चांदी की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। मांग में वृद्धि और खनन से सीमित आपूर्ति के बीच बना अंतर आने वाले समय में बाजार पर असर डाल सकता है।
इस अनुमान के अनुसार, अगले छह महीनों में 85 से 90 डॉलर प्रति औंस और दिवाली 2027 तक 120 डॉलर प्रति औंस का स्तर अंतरराष्ट्रीय बाजार में देखने को मिल सकता है। घरेलू बाजार में भी इसी आधार पर चांदी के चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
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