नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) से पहले देश के भविष्य और नेतृत्व को लेकर चिंता जताते हुए लोगों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें कोई उपहार देना है तो ऐसे लोगों के नाम सुझाएं, जो निस्वार्थ, चरित्रवान और सिद्धांतों पर चलने वाले हों तथा देश में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दे सकें।
वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से वह बीमार थे और बिस्तर पर रहते हुए देश के भविष्य के बारे में सोच रहे थे। उन्होंने कहा कि जितना सोचते गए, उतना ही निराश होते गए। उनके मुताबिक, पांच दशक पहले भारत के बराबर या पीछे रहे कई छोटे देश आज उससे काफी आगे निकल चुके हैं। उन्होंने थाइलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी जैसे मानकों पर भी भारत के सामने बड़ी चुनौती है।
वांगचुक ने चिंता जताई कि यदि परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। उन्होंने शिक्षा को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था पिछड़ी रहेगी, देश का भविष्य भी आगे नहीं बढ़ सकता।
उन्होंने हाल के आंदोलनों और राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों ने परिवर्तन की इच्छा जताई और कुछ बदलाव भी हुए, लेकिन केवल सरकार या मंत्री बदलने से कोई चमत्कार नहीं होगा।
वांगचुक ने कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर कार्रवाई के मामले में अलग-अलग दलों की सरकारों का रवैया कई बार एक जैसा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि उनकी बात किसी एक पार्टी या सत्ता पक्ष-विपक्ष के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की स्थिति को लेकर है।
उन्होंने कहा कि केवल सरकार बदलने से भ्रष्टाचार और अन्याय समाप्त नहीं हुआ। उनके अनुसार, देश में इससे भी बड़ा और शांतिपूर्ण परिवर्तन जरूरी है, ताकि सही नेतृत्व को आगे लाया जा सके।
वांगचुक ने देश के राजनीतिक नेतृत्व को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी कमियों में से एक सही नेतृत्व का चुनाव करने में रही है। जब नेतृत्व सही नहीं होता तो पूरा देश गलत दिशा में जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि संसद के करीब आधे सदस्यों पर आरोप हैं और कई सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने गंभीर आपराधिक आरोपों का भी उल्लेख किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी खास पार्टी या पक्ष-विपक्ष की बात नहीं कर रहे हैं।
वांगचुक ने कहा कि देश में बड़े बदलाव के लिए वे देश के ‘बेस्ट माइंड्स’ और बुद्धिजीवियों को साथ लाना चाहते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान के लिए जनता से मदद मांगी, जो केवल बौद्धिक रूप से सक्षम ही नहीं बल्कि निस्वार्थ, चरित्रवान और सिद्धांतों पर चलने वाले हों।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे व्यक्तियों के नाम सुझाएं, जिन्हें वे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और जो देश के भविष्य के लिए नई दिशा तय करने में योगदान दे सकते हैं। वांगचुक ने कहा कि वह ऐसे लोगों से मिलने के लिए राज्यों और शहरों में भी जाना चाहते हैं।
सोनम वांगचुक ने देशवासियों से कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें उपहार के तौर पर ऐसे लोगों के नाम दिए जाएं, जो देश को आगे ले जाने की क्षमता और नीयत रखते हों। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए अपनी अपील समाप्त की।
गौरतलब है कि वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के समर्थन में 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उनके अनशन के बाद आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने का दावा किया गया था। इसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात भी सामने आई थी।
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