नई दिल्ली। लोकसभा (Lok Sabha) में प्रश्नकाल के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) और उनके मंत्रालय की राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे (Shobha Karandlaje) सदन में मौजूद नहीं थे। उनके मंत्रालय से संबंधित सवाल की बारी आने पर दोनों मंत्रियों की अनुपस्थिति से सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा।
सवाल पूछे जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जवाब के लिए मंत्री का नाम पुकारा, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। दोबारा आवाज देने के बाद भी स्थिति जस की तस रही। इसके बाद उन्होंने पूछा कि संबंधित राज्य मंत्री कौन हैं, तब पता चला कि शोभा करंदलाजे भी सदन में उपस्थित नहीं हैं।
इस पर स्पीकर ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संसदीय कार्य मंत्री को निर्देश दिया कि इस घटना को नोट किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्यवाही के दौरान मंत्रियों की अनुपस्थिति किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
ओम बिरला ने सदन के भीतर लगातार हो रही बातचीत पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कार्यवाही के दौरान सदस्यों का लंबे समय तक आपस में चर्चा करना गलत परंपरा बनती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे ऐसा करने वालों का नाम आसन से लिया जाएगा।
प्रश्नकाल के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भी स्पीकर ने फटकार लगाई। यादव लंबे समय तक आसन की ओर पीठ करके खड़े थे। इस पर ओम बिरला ने उन्हें संसदीय परंपराओं का पालन करने और आसन का सम्मान करने की नसीहत दी।
लोकसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण सरकार और विपक्ष के बीच कभी टकराव तो कभी सहमति के दौर में बीता। विपक्ष द्वारा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव और महिला आरक्षण को लेकर सरकार के रुख पर खूब चर्चा हुई। सहमति नहीं बनने पर सरकार को विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक पर पीछे हटना पड़ा, जबकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और दिवालियापन संहिता संशोधन जैसे विधेयकों को पारित कराने में सफलता मिली।
स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर दो दिन चली चर्चा के बाद सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बढ़ते दिखे। वहीं पश्चिम एशिया संकट से जुड़े ऊर्जा और उर्वरक मुद्दों पर भी तीखी बहस की स्थिति बनी, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोनों सदनों में संबोधन और सर्वदलीय बैठक के बाद माहौल सामान्य हुआ।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग नोटिस भी दिया, जो बाद में गिर गया। इस तरह पूरे सत्र में राजनीतिक खींचतान के बीच कई अहम मुद्दों पर टकराव और सहमति दोनों देखने को मिले।
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