img-fluid

हाईकोर्ट जज नियुक्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त कॉलेजियम की गोपनीय प्रक्रिया की न्यायिक जांच से किया इनकार

June 26, 2026

नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) हाईकोर्ट (High Court) में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने स्पष्ट कर दिया है कि कॉलेजियम(Collegium)  की सिफारिशों में सामान्य परिस्थितियों में न्यायिक हस्तक्षेप (Judicial intervention) नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवैधानिक अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति पूरी तरह कॉलेजियम के स्वतंत्र आकलन और गोपनीय प्रक्रिया पर आधारित होती है। ऐसे मामलों की गहन न्यायिक जांच केवल असाधारण परिस्थितियों में ही संभव है।

मामला हिमाचल प्रदेश के एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका से जुड़ा था। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उस सिफारिश को चुनौती दी थी जिसमें उनसे जूनियर तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में आगे बढ़ाए गए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि पहले उनके नाम पर पुनर्विचार के निर्देश दिए गए थे लेकिन बाद में उनसे कनिष्ठ अधिकारियों की सिफारिश कर दी गई।

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पहले ही मंजूरी दे चुका है तब इस स्तर पर उस प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि कॉलेजियम की कार्यवाही पूरी तरह गोपनीय होती है और उसकी जांच पड़ताल शुरू करना पूरी व्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में गोपनीयता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। यदि हर सिफारिश की न्यायिक जांच शुरू कर दी जाए तो यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित करेगा और अनावश्यक विवादों का रास्ता खुल जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर कॉलेजियम के फैसलों की पड़ताल कर किसी नए विवाद या मुसीबतों का पिटारा नहीं खोलना चाहती।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें यह स्वतंत्रता दी कि यदि आवश्यक समझें तो हाईकोर्ट के सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत रखें अथवा उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लें।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी न्यायिक अधिकारी को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कॉलेजियम नियुक्ति के समय योग्यता अनुभव कार्यशैली ईमानदारी और समग्र मूल्यांकन जैसे कई पहलुओं पर विचार करता है। इसलिए केवल वरिष्ठ होने के आधार पर नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।


  • पीठ ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को औपचारिक रूप से खारिज किया गया है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने संकेत दिया कि उनकी सेवा अवधि अभी लंबी है और भविष्य में रिक्तियां आने पर उनके नाम पर फिर विचार किया जा सकता है।

    इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायपालिका में नियुक्तियों की पारदर्शिता जितनी महत्वपूर्ण है उतनी ही आवश्यक उसकी गोपनीयता भी है। कॉलेजियम प्रणाली में अदालत का हस्तक्षेप सीमित रहेगा ताकि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और गरिमा बनी रहे।

    Share:

  • कभी राजबाड़े के सामने बनता था सरकारी ताजिया

    Fri Jun 26 , 2026
    इमाम हुसैन के लिए कुछ अलग ही अक़ीदत थी … होलकर राजाओं में इंदौर। होलकरकाल में मोहर्रम के अवसर पर अस्थायी इमामबाड़ा राजबाड़े के मुख्य द्वार के समीप था। कर्बला तक निकलने वाले ताजिया जुलूस की अगुआई ख़ुद होलकर महाराजा हाथी पर सवार होकर किया करते थे। होलकर राजाओं में इमाम हुसैन के लिए कुछ […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved