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बिना तय जोन के बरगी बांध में उतारा गया था क्रूज

June 16, 2026

  • नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने जस्टिस संजय द्विवेदी को सौंपी रिपोर्ट

जबलपुर। बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच में एक नया मोड़ आ गया है। जस्टिस संजय द्विवेदी के एकल सदस्यीय जांच आयोग के समक्ष नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रतिनिधि डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने एक तकनीकी रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में प्रशासनिक अधिकारियों और क्रूज प्रबंधन पर जांच पूरी होने से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को नष्ट करने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम इनलैंड वैसल्स एक्ट 2021 की धारा 74(5) का खुला उल्लंघन है, जो साक्ष्य मिटाने की नीयत से उठाया गया। बिना आधिकारिक सर्वे सर्टिफिकेट, बिना फिटनेस मूल्यांकन और बिना लहरों की तीव्रता के आधार पर तय जोन प्रमाणपत्र के इस क्रूज का व्यावसायिक संचालन किया जा रहा था। मंच ने त्रुटिपूर्ण एसओपी, कप्तान की लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत को हादसे की वजह बताते हुए दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।


  • नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था जलपोत का संचालन
    बरगी जलाशय में सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा को दरकिनार कर क्रूज को पानी में उतारा गया था। किसी भी जलपोत के सुरक्षित संचालन के लिए उसकी श्रेणी तय करना और पानी की लहरों की ऊंचाई का आकलन करना बेहद जरूरी होता है। इसके आधार पर ही जोन 1, जोन 2 और जोन 3 का निर्धारण किया जाता है। शासन के पास इस बात की कोई पुख्ता जानकारी नहीं थी कि बरगी जलाशय किस जोन में आता है। इसके बावजूद बिना किसी सुरक्षा ऑडिट के एक गलत मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई। क्रूज की वास्तविक बनावट, उसकी तकनीकी डिजाइन और क्षमता की जांच किए बिना ही उसे लगातार चलाया जा रहा था, जो आखिरकार एक बड़े हादसे का कारण बना।

    जांच को प्रभावित करने के लिए जल्दबाजी में मिटाए गए तकनीकी साक्ष्य
    हादसे के बाद क्रूज के ढांचे को जिस तेजी से काटा और डिसमेंटल किया गया, उसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तकनीकी प्रतिवेदन में दावा किया गया है कि क्रूज की फिटनेस की कमियों और अधिकारियों की गलतियों को छुपाने के लिए यह सोची-समझी रणनीति थी। क्रूज को नष्ट करना सीधे तौर पर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और दोषियों को बचाने का प्रयास है। इस मामले में क्रूज मालिकों और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच मिलीभगत के आरोप लगाते हुए उन्हें तुरंत निलंबित करने की मांग की गई है। जस्टिस संजय द्विवेदी ने इस प्रतिवेदन को रिकॉर्ड में शामिल कर सभी बिंदुओं की गहराई से जांच करने का भरोसा दिया है।

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