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गढ़ा आश्रम का चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किया था जिक्र, गौतम बुद्ध यहां किए थे प्रवास

January 17, 2026

सुल्तानपुरः भारत (India) में कई ऐसे प्राचीन (Ancient) और ऐतिहासिक स्थल (Historical Site) है जिसका जिक्र प्रमाणिक आधार पर किया जाता है. इन्हीं स्थलों में एक है उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले (Sultanpur District) में गढ़ा आश्रम (Gadh Ashram). जो हजारों वर्ष पुराना माना जाता है. यह प्राचीन स्थल बौद्ध धर्म (Buddhism) का एक प्रसिद्ध स्थल हुआ करता था. जहां पर बौद्ध अनुयायी अपने धर्म के अनुसार पूजा पाठ किया करते थे. इस स्थल का जिक्र चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी किया है. इसके साथ ही अवध गजेटियर 1902 में भी इसका जिक्र हुआ है.

यहां पर कुड़वार को केशिपुत्त के नाम से जाना गया जो 13वीं शताब्दी तक कायम रहा. यहां पर कलमवंशीय क्षत्रियों को गौतम बुद्ध ने उपदेश दिया था. जानकारों के मुताबिक लगभग 6 महीने तक गौतम बुद्ध ने प्रवास किया था. 636 ईसा पूर्व में जब चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया तब उसने सुल्तानपुर के इस गढ़ा आश्रम का जिक्र किया. इसके साथ ही बौद्ध धर्म के धार्मिक ग्रंथ कलामसुत्तपिटक में भी इस स्थल का जिक्र हुआ है. जिसमें 10 गणराज्यों में कुड़वार के गढ़ा का जिक्र हुआ है.


  • भारतदास बताते हैं कि साल 1985-86 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा इस स्थल की खुदाई करवाई गई जहां पर बौद्ध मूर्ति और कई ऐसे प्रमाण निकले थे जिससे गढ़ा के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया लेकिन या दुर्भाग्य की इस प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल को तमाम सरकारों ने इग्नोर किया यहां पर किसी भी तरह का कोई डेवलपमेंट का काम और संरक्षण का काम नहीं हो सका.

    गढ़ा आश्रम में मौजूद वर्तमान में भी लखौरी ईंटें इस बात का प्रमाणिक आधार है कि यह स्थल हजारों वर्ष पुराना है. यहां पर गौतम बुद्ध ने कलाम वंशीय क्षत्रियों को उपदेश दिया. इस संबंध में कुछ जिक्र गजेटियर आफ अवध 1903 में किया गया है. यह स्थल सुल्तानपुर मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर कुड़वार ग्रंट ग्राम सभा में स्थित है. यह गोमती नदी के पूरब किनारे पर स्थित है.

    बौद्ध धर्म से संबंधित इस ऐतिहासिक स्थल ने संरक्षण और देखरेख के अभाव में अपनी प्राचीनता को लगभग खो सा दिया है लेकिन यहां पर वर्तमान में कुछ कबीरपंथी महात्मा रहते हैं और इस स्थल की देखरेख कर रहे हैं, इसका संरक्षण कर रहे हैं हालांकि उनका बौद्ध धर्म से कोई संबंध नहीं है. वह कबीर की विचारधारा को मानने वाले लोग हैं जो यहां पर जीवन यापन कर रहे हैं.

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