
नागदा। इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ ने एक बार फिर नपा की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। खंडपीठ ने मप्र औद्योगिक न्यायधिकरण इंदौर द्वारा 20 सितंबर 2024 को पारित निर्णय को बरकरार रखा है। नगरीय निकाय कर्मचारी महासंघ के महामंत्री भवानी सिंह शेखावत ने कर्मचारियों के वेतन विसंगतियों को लेकर न्यायालय गए थे। न्यायालय ने श्रमिकों के पक्ष में आदेश दिया था।
नपा द्वारा 20 सितंबर 2024 में कर्मचारियों के पक्ष में हुए पारित आदेश के विरुद्ध में सर्वोच्च न्यायलय दिल्ली में भी अपील की गई थी, परंतु सर्वोच्च न्यायलय द्वारा नपा की अपील को प्रारंभिक स्टेज पर ही 12 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया था। नागदा नगरपालिका द्वारा इस बार फिर अभिभाषक बदलकर पुन: इंदौर खंडपीठ में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर पूर्व में हुए आदेश की सुनवाई के लिए विशेष अनुमति मांगी गई थी। जिसे न्यायमूर्ति द्वारा खारिज कर दिया गया। अपने निर्णय में न्यायामूर्तिगण ने स्पष्ट किया की सर्वोच्च न्यायलय द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करने की कोई विशिष्ट अनुमति नहीं दी है। अगर नगर पालिका नागदा आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है तो वित्तीय सहायता के लिए राज्य सरकार से संपर्क कर सकती है। न्यायपूर्तिगण द्वारा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की दुर्दशा, अस्थाई रोजगार अनुबंधों का व्यापक दुरूपयोग जो श्रमिकों के अधिकारो और नौकरी की सुरक्षा को प्रभावित करता है पर भी चिंता जताई गई। नपा की याचिका खारिज होने पर कर्मचारी महेंद्र गुर्जर, मनीष शर्मा, संदीप सोलंकी, महेश पिंडोलिया, घनश्याम प्रजापत, ध्रुव रघुवंशी, विकास निहोरे आदि ने हर्ष जताया है।
टैक्स के रुपयों को वकीलों पर खर्च क्यों?
नगरीय निकाय कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष पवन गुर्जर, मंत्री गौतम जैन और प्रीति प्रजापत ने कहा कि नपा कर्मचारियों के हक मारने के लिए हर जगह याचिका दायर कर रही है, जबकि कर्मचारी ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं। न्यायालय का आदेश मानने के बजाए नपा आमजनों के टैक्स के रुपयों को वकीलों व कानूनी व्यय के नाम पर फीस में उड़ा रही है, ताकि मजदूरों को उनका हक नहीं मिल सके।