
इंदौर। इंदौर (Indore) के BRTS कॉरिडोर को हटाने का मामला पिछले एक साल से फाइलों और बयानों में अटका हुआ है। अधिकारियों की लगातार टालमटोल और लापरवाही पर सोमवार (12 जनवरी) को इंदौर हाईकोर्ट का गुस्सा फूट पड़ा। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला (Justice Vijay Kumar Shukla) और जस्टिस आलोक अवस्थी (Justice Alok Awasthi) की डबल बेंच ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
कोर्ट ने अब सबको किया तलब
सुनवाई के दौरान जब अधिकारियों से काम रुकने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने फिर पुराना राग अलापा कि “ठेकेदार काम छोड़कर भाग गया है।” इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने आपत्ति जताते हुए कहा कि हर बार ठेकेदार का बहाना बनाया जाता है।
हाईकोर्ट ने अब सख्ती दिखाते हुए अगली सुनवाई यानी 19 जनवरी को न केवल कलेक्टर, निगमायुक्त और ट्रैफिक डीसीपी को, बल्कि पीडब्ल्यूडी (PWD) चीफ इंजीनियर, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर और संबंधित ठेकेदार को भी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।
नोडल अधिकारी की नियुक्ति पर जताई नाराजगी
कोर्ट इस बात पर भी बिफर गया कि एक महीने बाद भी ट्रैफिक डीसीपी ने नोडल अधिकारी की नियुक्ति के बारे में कोर्ट द्वारा गठित वकीलों की कमेटी को सूचित नहीं किया। कोर्ट ने प्रशासन की इस सुस्त कार्यप्रणाली को ‘लालफीताशाही’ करार दिया और कहा कि अधिकारी केवल एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं।
अवैध धर्मस्थलों और ध्वनि प्रदूषण पर एक्शन रिपोर्ट तलब
शहर में ट्रैफिक बाधित करने वाले अवैध धार्मिक अतिक्रमण को लेकर भी कोर्ट ने कलेक्टर को फटकार लगाई। प्रशासन ने केवल 4 अतिक्रमण बताए, जिस पर कोर्ट ने आश्चर्य जताया। अधिवक्ता बागडिया ने कोर्ट को बताया कि प्रशासन ने पूरे शहर के बजाय केवल बीआरटीएस मार्ग की रिपोर्ट दी है।
कोर्ट का आदेश
अगले 2 सप्ताह में पूरे शहर के अवैध धर्मस्थलों और अवैध लाउडस्पीकर (ध्वनि प्रदूषण) पर एक्शन रिपोर्ट पेश करें।
24 घंटे ट्रैफिक लाइट और बैटरी बैकअप के निर्देश
इंदौर के बिगड़ते ट्रैफिक को देखते हुए हाईकोर्ट ने 2019 के अपने पुराने आदेश की याद दिलाई। कोर्ट ने कहा शहर की सभी ट्रैफिक लाइट्स 24 घंटे चालू रहनी चाहिए। बिजली जाने की स्थिति में बैटरी बैकअप की अनिवार्य व्यवस्था हो। शासन इस पर क्या ठोस कदम उठा रहा है, इसकी विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में दी जाए।
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