
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान के बीच सबीना यास्मीन के इस्तीफे ने सियासी पारा को फिर से गरम कर दिया. महिला तृणमूल की प्रेसिडेंट सबीना यास्मीन का अपने पद से इस्तीफा देना ऋतब्रत बनर्जी गुट के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह कहा है कि वह पार्टी नहीं छोड़ रही हैं. बीते महीने ही सबीना से NIA ने पूछताछ की थी.
ममता बनर्जी के दुश्मन गुट ऋतब्रत बनर्जी ग्रुप को पहला झटका लगा है. हालांकि,उन्होंने पद छोड़ने का कारण अपनी खराब सेहत को बताया है.
पश्चिम बंगाल में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद से ही TMC में लगातार सियासी हलचल जारी है. सबीना यास्मीन ने तृणमूल कांग्रेस की डेमोक्रेटिक महिला प्रेसिडेंट के पद से इस्तीफा दे दिया है. अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि भले ही वह पद छोड़ रही हैं, लेकिन पार्टी नहीं छोड़ रही हैं.
सबीना यास्मीन ने खराब सेहत का हवाला देते हुए इस गुट की महिला विंग की अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है. उनके इस फैसले को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अपने फैसले की जानकारी संबंधित नेताओं को दी है. उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए संगठन की जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाना संभव नहीं है.
सबीना ने बुधवार को राज्य प्रेसिडेंट बिप्लब मित्रा को एक लेटर लिख इस बारे में बताया. इसके अलावा उन्होंने MLA के व्हाट्सएर ग्रुप को भी इस बारे में सूचना दी. उनके इस बयान ने सियासी पंडितों का ध्यान खींचा है. ऐसा इसलिए क्योंकि ऋतब्रत कैंप के नेताओं ने शुरू से ही लगातार यह दावा किया है कि वे तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हैं.
सबीना यास्मीन मालदा जिले की सुजापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं. तृणमूल कांग्रेस में जब फूट पड़ी थी तो वे पार्टी के बागियों वाले ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हो गई थीं और उन्हें महिला विंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
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