नई दिल्ली। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) यानी किस्तों के जरिए म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में निवेश 2025 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। निवेशकों में अनुशासित और लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की बढ़ती रुचि के चलते 2025 में एसआईपी के माध्यम से कुल निवेश 3.34 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में एसआईपी के जरिए 2.68 लाख करोड़ रुपये और 2023 में 1.84 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ था।
जानकारों ने कहा कि निवेशकों ने बाजार में गिरावट को निवेश के अवसर के रूप में लगातार इस्तेमाल किया है। 2025 में 3.34 लाख करोड़ रुपये का कुल एसआईपी निवेश निवेशकों की लंबी सोच को दर्शाता है।
दिसंबर में रिकॉर्ड: सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में एसआईपी योगदान लगातार 29,000 करोड़ से ऊपर रहा, जबकि दिसंबर में यह रिकॉर्ड 31,000 करोड़ के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
2025 3.34
2024 2.68
2023 1.84
आंकड़े लाख करोड़ रुपये में
इक्विटी फंड में तेजी का रुझान बरकरार
इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश 3.8 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसे मजबूत एसआईपी योगदान और भारत की लंबी अवधि की विकास कहानी में निवेशकों के भरोसे का समर्थन मिला। एम्फी के सीईओ वेंकट चलसानी ने पहले कहा था कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।
क्या होता है एसआईपी
गौरतलब है कि एसआईपी म्यूचुअल फंड द्वारा दिया जाने वाला एक निवेश विकल्प है, जिसके तहत निवेशक एकमुश्त राशि लगाने के बजाय तय अंतराल, जैसे हर महीने में एक निश्चित रकम निवेश कर सकता है। एसआईपी की किस्त 250 रुपये प्रति माह से भी शुरू की जा सकती है।
इन वजहों से बंद करा दी जाती हैं एसआईपी
1. बाजार में उतार-चढ़ाव: शेयर बाजार में तेज गिरावट या लगातार अस्थिरता से निवेशकों में घबराहट बढ़ती है।
2. नुकसान का डर: एसआईपी की वैल्यू घटने पर कई निवेशक धैर्य खो देते हैं और निवेश रोक देते हैं।
3. आर्थिक दबाव: महंगाई बढ़ने, ईएमआई या घरेलू खर्च बढ़ने से लोगों के पास निवेश के लिए अतिरिक्त पैसा नहीं बचता।
4. नौकरी या आय में अनिश्चितता: छंटनी, वेतन कटौती या फ्रीलांस आय घटने पर एसआईपी सबसे पहले बंद की जाती है।
5. तुरंत नकदी की जरूरत: मेडिकल, शिक्षा, शादी या अन्य आकस्मिक खर्चों के लिए निवेश रोकना पड़ता है।
6. गलत अपेक्षाएं: कुछ निवेशक एसआईपी से कम अवधि में ऊंचे रिटर्न की उम्मीद करते हैं, जो पूरी न होने पर निराश हो जाते हैं।
7. ब्याज दरों में बढ़ोतरी: लोन और ईएमआई महंगी होने से निवेश की क्षमता प्रभावित होती है।
8. अन्य विकल्पों की ओर झुकाव: एफडी, आरडी या सरकारी स्कीम्स में सुरक्षित रिटर्न देखकर एसआईपी बंद कर दी जाती है।
9. सलाह की कमी: सही फाइनेंशियल सलाह न मिलने से लोग बाजार गिरते ही गलत फैसला कर लेते हैं।
10. टैक्स या नियमों को लेकर भ्रम: टैक्सेशन या नए नियमों की गलत समझ भी एसआईपी रोकने का कारण बनती है।
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