
जोधपुर: जोधपुर (Jodhpur) में आयोजित माहेश्वरी महाधिवेशन और ग्लोबल एक्सपो (Maheshwari Convention and Global Expo) में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े (Governor Haribhau Bagde) शामिल हुए. जोधपुर प्रवास के दौरान राज्यपाल ने इस बड़े सामाजिक और औद्योगिक आयोजन में शिरकत की और मंच से समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग, उद्यमी और प्रतिनिधि मौजूद रहे. अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने देश के भविष्य से जुड़े एक गंभीर विषय जनसंख्या (Population) असंतुलन पर चिंता जताई और इसे समय रहते संभालने की जरूरत बताई.
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े जोधपुर प्रवास पर रहे, जहां उन्होंने माहेश्वरी महाधिवेशन एवं ग्लोबल एक्सपो में भाग लिया. इस मौके पर उन्होंने समाज (Society) के सामने विचार रखते हुए कहा कि ऐसे आयोजन केवल आर्थिक या सामाजिक मेल-मिलाप तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि यहां से समाज को दिशा देने वाले मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि समाज की भूमिका देश के विकास में बेहद अहम होती है और ऐसे मंच विचार-विमर्श का बड़ा अवसर होते हैं.
अपने संबोधन में राज्यपाल ने देश में बढ़ते जनसंख्या असंतुलन को लेकर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आज देश में एक अजीब और चिंताजनक स्थिति बनती जा रही है. जिन लोगों के पास खाने तक की व्यवस्था नहीं है, उनकी जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि जिन लोगों के पास देने की क्षमता है, जो समाज और देश को आगे बढ़ा सकते हैं, उनकी संख्या घटती जा रही है. राज्यपाल ने कहा कि यह असंतुलन आने वाले समय में देश के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है.
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने दो पीढ़ी पहले के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में संसाधन बेहद सीमित थे, फिर भी परिवारों में संतुलन बना रहता था. उन्होंने कहा कि लोग कम साधनों में भी जिम्मेदारी के साथ जीवन जीते थे. आज अगर दो पीढ़ी पहले जितने बच्चे भी हों, तो भी संतुलन बना रह सकता है, बशर्ते सोच जिम्मेदार हो. उन्होंने कहा कि समस्या संसाधनों की नहीं, बल्कि सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की है.
राज्यपाल ने समाज को आत्ममंथन करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि जनसंख्या का असर सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और संसाधनों पर पड़ता है. अगर संतुलन बिगड़ता है, तो इसका बोझ पूरे समाज को उठाना पड़ता है. इसलिए हर वर्ग को इस विषय पर गंभीरता से सोचना चाहिए और जिम्मेदारी के साथ फैसले लेने चाहिए.
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने राज्यपाल के विचारों को गंभीरता से सुना. उनके बयान को समाज और देश के भविष्य के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. बिना किसी वर्ग या समुदाय का नाम लिए राज्यपाल ने साफ तौर पर यह संदेश दिया कि अगर जनसंख्या असंतुलन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं. माहेश्वरी महाधिवेशन और ग्लोबल एक्सपो के मंच से दिया गया यह संदेश लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला माना जा रहा है.
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