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जिस बनी सडक़ को खोदा वहां स्टार्म वॉटर लाइन की जरूरत ही नहीं

November 01, 2025

  • मनमर्जी से फाइलें बन जाती है झोनल कार्यालयों में, मामला तीन ईमली में एक महीने पहले ही बनी सडक़ को खोद डालने का

इंदौर। एक तरफ शहरभर की सडक़ें बारिश के कारण गड््ढामय हो गई है, तो दूसरी तरफ बनी-बनाई सडक़ों को खोद दिया जाता है। कल ऐसा ही मामला तीन ईमली चौराहा पर नजर आया, जब महापौर पुष्यमित्र भार्गव एक शिकायत की जांच करने पहुंचे, तो पता चला कि महीनेभर पहले ही बनी सडक़ को स्टार्म वॉटर लाइन डालने के लिए खोद डाला। इस पर नाराज होते हुए महापौर ने निगम के अफसरों से पूछा कि जब स्टार्म वॉटर लाइन डालना थी तो सडक़ बनने के पहले क्यों नहीं डाली गई। दूसरी तरफ इस मामले में एक और नई जानकारी यह सामने आई कि जिस सडक़ को खोदा वहां पर हकीकत में स्टार्म वॉटर लाइन डालने की जरूरत भी नहीं है, क्योंकि 4 से 6 फीट सडक़ का ढाल दिया हुआ है।

महापौर को एक रहवासी ने वीडियो भेजकर नई बनी सडक़ की खुदाई की जानकारी दी, उसके बाद महापौर खुद मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, झोनल अधिकारी अतीक खान सहित ठेकेदार और कंसल्टेंट एजेंसी के प्रतिनिधियों को बुलाया। महापौर ने स्पष्ट पूछा कि बनी-बनाई सडक़ क्यों खोदी और लाइन पहले डालना थी। महापौर के साथ मौके पर पहुंचे जनकार्य समिति प्रभारी राजेन्द्र राठौर का कहना है कि झोनल कार्यालयों से मनमर्जी से फाइलें बना ली जाती है, बिना मैदानी हकीकत को जाने।


  • जिस बनी सडक़ को स्टार्म वॉटर लाइन डालने के लिए खोदा गया, वहां पर हकीकत में लाइन डालने की आवश्यकता ही नहीं है, क्योंकि पहले से ही सडक़ का ढाल पर्याप्त दिया गया है, जिसके चलते सडक़ का पानी आसानी से बह जाएगा। बावजूद इसके अगर लाइन डालने की जरूरत महसूस भी हुई तो कम से कम सडक़ बनने से पहले लाइन डाल देते। इससे निगम को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ रहवासियों की परेशानी भी कम होती। महापौर ने कंसल्टेंट को भी फटकार लगाई कि किस तरह की मॉनिटरिंग की जा रही है। यहां तक कि अधिकारी इस बात का भी जवाब नहीं दे पाए कि सडक़ बनने के बाद उस इलाके में जल-जमाव की कोई शिकायत मिली अथवा नहीं और स्टार्म वॉटर लाइन डालना क्यों जरूरी लगा। दरअसल, नगर निगम में पूर्व में भी इस तरह की फाइलें बनकर परवारे ही काम करवा लिए जाते हैं। महापौर ने ये भी निर्देश दिए कि इस मामले के जिम्मेदारों पर कार्रवाई करें और एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करते हुए पेनल्टी लगाते हुए इस नुकसान भरपाई भी कंसल्टिंग एजेंसी से की जाए। अभी निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव भी स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि सडक़ निर्माण से पहले ही सभी तरह की लाइनें डाल दी जाए, ताकि बाद में फिर से खुदाई ना करना पड़े।

    ठेकेदारों को सडक़ों के काम तुरंत करने के दिए निर्देश
    कल नगर निगम के जनकार्य समिति प्रभारी ने पालिका प्लाजा में मास्टर प्लान की 23 सडक़ों का निर्माण करने वाली 23 सडक़ों के ठेकेदार फर्म, निगम इंजीनियरों को निर्देश दिए गए कि अब चूंकि बारिश का मौसम बीत गया है और फटाफट सडक़ों के काम शुरू किए जाएं। हालांकि बीते दो-तीन दिनों से मावठे की बारिश के कारण भी पेंचवर्क सहित अन्य निर्माण कार्य फिर से प्रभावित हुए हैं। जनकार्य समिति प्रभारी राजेन्द्र राठौर के मुताबिक, ठेकेदार एजेंसियों को कहा गया है कि वे अपने साधन-संसाधन जुटा लें, ताकि अगले डेढ़ से दो वर्षों में ये सभी सडक़ें बन सकें। अगर कोई एजेंसी काम में लापरवाही या ढील-पोल बरतेगी तो उसे काम भी वापस भी लिया जा सकता है।

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