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कभी सुपरस्टार होने का था ऐसा दौर कि अमिताभ बच्चन संग फोटो तक कराने से किया इनकार, वक्त बदला तो उन्हीं से मांगना पड़ा काम

July 18, 2026


नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत शानदार सफलता के साथ की, लेकिन समय के साथ उनका सितारा फीका पड़ गया। 70 के दशक के अभिनेता नवीन निश्चल (Navin Nischol) भी ऐसे ही कलाकारों में गिने जाते हैं। अपनी पहली ही फिल्मों से लोकप्रियता (Popularity) हासिल करने वाले नवीन निश्चल ने उस दौर में स्टारडम (Stardom) का ऐसा मुकाम देखा, जहां उन्हें उद्योग के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में शामिल किया जाने लगा। हालांकि बाद के वर्षों में उनका करियर (Career) पहले जैसी गति बनाए नहीं रख सका और उनसे जुड़े कई किस्से फिल्मी गलियारे (Film Industry) में चर्चा का विषय बनते रहे।

नवीन निश्चल ने वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म ‘सावन भादो’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखा। इस फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री रेखा भी पहली बार बड़े पर्दे पर दिखाई दीं। फिल्म को दर्शकों का भरपूर समर्थन मिला और दोनों कलाकारों को उद्योग में नई पहचान मिली। शुरुआती सफलता के बाद नवीन निश्चल के पास लगातार फिल्मों के प्रस्ताव आने लगे और वे उस समय के चर्चित अभिनेताओं में शामिल हो गए।

इसके बाद वर्ष 1971 में उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें ‘परवाना’ भी शामिल थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन अपेक्षाकृत छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नकारात्मक किरदार में नजर आए थे। बाद के वर्षों में फिल्म उद्योग में यह चर्चा होती रही कि उस समय नवीन निश्चल अपने स्टारडम के कारण स्वयं को स्थापित कलाकार मानते थे और अमिताभ बच्चन को उतनी अहमियत नहीं देते थे। हालांकि इन घटनाओं से जुड़े कई दावे संस्मरणों और फिल्मी चर्चाओं पर आधारित हैं तथा उनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

फिल्म जगत से जुड़े पुराने किस्सों के अनुसार यह भी कहा जाता है कि नवीन निश्चल ने कुछ ऐसी फिल्मों में काम करने से इनकार किया था, जो आगे चलकर बड़ी सफल साबित हुईं। इनमें कुछ ऐसी फिल्में भी शामिल बताई जाती हैं जिनसे बाद में अमिताभ बच्चन और अन्य प्रमुख कलाकारों के करियर को नई ऊंचाइयां मिलीं। हालांकि इन दावों को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाता।

समय के साथ हिंदी सिनेमा का परिदृश्य बदला और नए कलाकारों के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई। इसी दौर में अमिताभ बच्चन का सितारा तेजी से बुलंद हुआ, जबकि नवीन निश्चल के फिल्मी अवसर सीमित होने लगे। उन्होंने बाद के वर्षों में चरित्र भूमिकाओं और सहायक किरदारों के माध्यम से अभिनय जारी रखा। फिल्म और टेलीविजन दोनों माध्यमों में उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कई यादगार भूमिकाएं निभाईं।

फिल्म उद्योग में अक्सर यह कहा जाता है कि सफलता और लोकप्रियता स्थायी नहीं होती। हर दौर में कलाकारों को बदलते समय, दर्शकों की पसंद और नई चुनौतियों के अनुसार स्वयं को ढालना पड़ता है। नवीन निश्चल का करियर भी इसी बदलाव का एक उदाहरण माना जाता है, जहां शुरुआती सफलता के बाद परिस्थितियां धीरे-धीरे बदलती चली गईं।


  • आज भी नवीन निश्चल का नाम हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में लिया जाता है जिन्होंने अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। वहीं अमिताभ बच्चन के साथ जुड़े पुराने किस्से समय-समय पर चर्चा में आते रहते हैं। हालांकि ऐसे प्रसंगों को ऐतिहासिक तथ्य मानने से पहले उनके प्रमाण और विश्वसनीय स्रोतों पर ध्यान देना आवश्यक है। उनके फिल्मी सफर को भारतीय सिनेमा के बदलते दौर और स्टारडम की अनिश्चितता के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

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