
मध्यप्रदेश में आकर चन्द्रशेखर हो गए तिवारी
आखिरकार भाजपा में प्रदेश संगठन महामंत्री की नियुक्ति हो ही गई। इसके बाद अब माना जा रहा है कि भाजपा संगठन जो बेलगाम-होने लगा था और गुटबाजी हो रही थी, उस पर लगाम लगेगी, वहीं बिप्लव देव जैसे नेता को प्रदेश प्रभारी बनाकर भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मध्यप्रदेश भाजपा को मजबूत करने पर जोर दिया है। बात करें संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर की तो, उनके बारे में बताया जा रहा है कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नजदीकियों में रहे हैं। उन्हें जब राजस्थान भेजा गया था, तब उनका नाम चन्द्रशेखर ही था। इसी नाम से वे तेलंगाना भेजे गए। अब एमपी में उनका नाम चन्द्रशेखर तिवारी हो गया और अब सब जान गए हैं कि वे ब्राह्मण समाज से आते हैं। अब भाजपा के ही नेता समझ नहीं पा रहे हैं कि प्रचारकों को केवल नाम से ही जाना जाता है, न कि उनके सरनेम या जाति से। अब चन्द्रशेखर मध्यप्रदेश में आकर तिवारी क्यों हो गए हैं? इसके पीछे भी कुछ न कुछ पॉलिटिक्स है प्यारे।
गिने-चुने भाजपाइयों ने लाज रख ली
सेवा संकल्प अभियान के तहत भाजपाइयों को एक महीने तक अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से काम दिया हुआ है। पार्टीर् में इसके अलावा कोई दूसरा काम भी नहीं हो रहा है। इसी के बीच में राजबाड़ा पर नुक्कड़ नाटक रखा गया था। नुक्कड़ नाटक क्या था, सरकारी योजाओं का प्रचार-प्रसार था। समय दिया गया था 5 बजे का, लेकिन भाजपाई ही इक_ा नहीं हुए। उधर नगर अध्यक्ष के आने की सूचना हुई तो इधर जितने भाजपाई थे, उनकी ही मौजूदगी में 6 बजे कार्यक्रम शुरू कर दिया, जो 15 मिनट में निपट भी गया। इसमें गिने-चुने नगर पदाधिकारी और पार्षद ही पहुंचे।
आपा खो बैठते हैं कांग्रेस के नेता
कांग्रेस के एक नेता क्या प्रवक्ता हैं, जो दो नंबर विधानसभा से आते हैं और भिया को बोलने का बहुत शौक है और जब भी बोलने का मौका मिलता है, वे पीछे नहीं हटते। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा पर की गई टिप्पणी को लेकर वे सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हुए। अब नेताजी ने एक और वीडियो सोशल मीडिया प्रोफाइल पर पोस्ट किया है, जिसमें मंत्री विजयवर्गीय को लेकर कुछ ऐसी बातें कही गईं, जो आपत्तिजनक मानी जा सकती है। वैसे ये जवाब उन्होंने विजयवर्गीय के एक बयान के बाद दिया। कुछ भी कहने की आदत के कारण कहीं नेताजी कांग्रेस का बंटाढार न करा दे।
महू में बनने लगे नए राजनीतिक गणित
महू में भाजपा की राजनीति के दो धु्रव पिछले दिनों एकसाथ नजर आए। राधेश्याम यादव और उषा ठाकुर का एयरपोर्ट पर यूं मिलना भाजपा नेताओं को भी आश्चर्यचकित कर गया। कभी महू विधानसभा सीट से टिकट मांगने वाले राधेश्याम यादव उषा ठाकुर के टिकट मिलने पर नाराज हो गए थे और चुनाव संचालक बनने से भी मना कर दिया था, लेकिन पिछले दिनों जब एयरपोर्ट पर दोनों एक-दूसरे के सामने हुए तो बड़ी गर्मजोशी से मिले। हालांकि अब यादव महू की सक्रिय राजनीति से दूर हैं। उन्हें धार का प्रभारी बना रखा है। लग रहा है कि दोनों के बीच गिले-शिकवे भी अब दूर होने लगे हैं। खैर यह तो 2028 के चुनाव में ही मालूम चलेगा कि यादव किस भूमिका में होंगे?
आखिर गांधीजी तक पहुंचने में देरी क्यों हुई
गांधी जयंती पर कांग्रेसी जरा देर से क्या पहुंचे कि भाजपाइयों को उन पर चढ़ाई का मौका मिल गया और भाजपा नेताओं ने कह डाला कि गांधीजी को ही कांग्रेसी भूल गए थे। हालांकि भाजपाई सुबह जल्दी रीगल चौराहा स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आए थे। कांग्रेसी साढ़े 9 बजे पहुंचे, लेकिन उसके पहले उनका लवाजमा पहुंच गया था, जिसमें सर्वधर्म सभा आयोजित करने वाले विभिन्न धर्मों के लोग भी थे। कांग्रेसियों द्वारा कहा जा रहा है कि हम तो हर साल गांधी जयंती और पुण्यतिथि मनाते हैं, रही बात देरी की तो हम नहीं चाहते थे कि भाजपाइयों से हमारा सामना हो।
भिया ने बोला है पटाखे का लाइसेंस दे दो
दशहरा और दिवाली आने वाले हैं और इनको लेकर लगने वाली पटाखा दुकानों के लिए कलेक्टर कार्यालय में प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वैसे प्रशासन हर बार कहता है कि नए लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे, लेकिन भिया के प_े हैं कि मानते नहीं और लाइसेंस लेने के लिए कलेक्टर कार्यालय पर चक्कर लगा रहे हैं। अभी ऐसे ही पट्ठों की लाइन कलेक्टर कार्यालय में लग रही है, जो किसी मंत्री या विधायक का सिफारिशी लेटर कलेक्टर ऑफिस पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें रटा-रटाया जवाब दिया जा रहा है कि इस बार नए लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे।
गरबों को लेकर आकाश की चिंता
पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने नवरात्रि के पहले अपनी सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया है। इसमें उन्होंने शहर के गरबा आयोजकों से कहा है कि वे अपने यहां नवरात्रि में गरबों के दौरान फिल्मी गीतों की बजाय, माता रानी के भजनों और गीतों पर गरबा करवाएं। उन्होंने बच्चियों के माता-पिता से भी कहा है कि आप जहां अपनी बच्ची या बेटी को भेज रहे हैं तो वहां यह पता करें कि वहां फिल्मी गीत तो नहीं बज रहे हैं, क्योंकि इसका असर बच्चियों के अवचेतन मन पर पड़ता है। अगर भक्ति और भजन पर गरबे होंगे तो उसका सकारात्मक प्रभाव होगा। आकाश की चिंता का असर गरबा आयोजकों पर कितना पड़ता है या फिर वही ढांक के तीन पात नजर आते हैं।
6 साल बाद चुनरी यात्रा निकालने वाले सुदर्शन गुप्ता को इस बार की चुनरी यात्रा में भीड़ की चिंता है। इसलिए वे एक नंबर विधानसभा से बाहर जाकर भी बैठकें ले रहे हैं , ताकि भीड़ जुटाकर बताया जा सके कि सुदर्शन के चक्र में अभी भी दम है।
-संजीव मालवीय
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