
कांग्रेस को महंगा पड़ जाता घंटा
घंटा को मुद्दा बनाते हुए युवा कांग्रेस द्वारा पिछले दिनों नगर निगम (Municipal council) पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के लिए बर्तन बाजार (Utensil market) से 5 घंटे को 4 घंटे के लिए किराए पर लिया गया था। इसके लिए कांग्रेस नेता महक नागर ने बर्तन बाजार की बर्तन दुकान में 28 हजार रुपए बतौर सिक्योरिटी जमा कराए थे। प्रदर्शन के दौरान सभी 5 घंटे पुलिस द्वारा जब्त कर थाना एमजी रोड पहुंचा दिए गए। बाद में मुचलके पर छूटे युवक कांग्रेसियों के निवेदन पर सभी 5 घंटे पुलिस ने वापस कर दिए। अगर यह घंटे पुलिस वापस नहीं देती तो युवक कांग्रेस नेता के 28 हजार रुपए व्यापारी द्वारा जब्त कर लिए जाते, लेकिन गनीमत रही कि एक तो दुबले ऊपर से दो अषाढ़ के दौरान युवा कांग्रेसियों को पुलिस की रहमदिली के कारण 28 हजार रुपए वापस मिल गए।
इसीलिए याद आते हैं दिग्विजय
भागीरथपुरा के मामले को लेकर कांग्रेस वैसा माहौल नहीं बना सकी, जैसा इतने बड़े मामले में बनना चाहिए था। इसके बाद में जब प्रदेश कांग्रेस द्वारा बनाई गई कमेटी जांच के लिए पहुंची तो उस कमेटी को भागीरथपुरा में लोगों के घर जाकर मिलने नहीं दिया गया। पुलिस ने लोगों से मिलने के लिए पहुंचे कमेटी के सदस्यों और कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। ऐसी स्थिति में अब कांग्रेस के नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की याद आ रही है। सीतलामाता बाजार से अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों को नौकरी से निकलने के मुद्दे पर सीतलामाता बाजार में जाकर उन्होंने मोर्चा लिया था। इसके साथ में इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले गए थे। अभी तो भागीरथपुरा वाले मामले में दिग्गी राजा की इंदौर की तरफ चहलकदमी नहीं हो पा रही है। कांग्रेसी मानते हैं कि सो सुनार की तो एक लोहार की… इसी तर्ज का हमला उस वक्त होगा, जब राजा इस क्षेत्र में पहुंचेंगे।
परिषद के खाते में नया रिकॉर्ड
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली परिषद के खाते में दो नए रिकॉर्ड दर्ज हो गए हैं। पहला रिकॉर्ड तो यह है कि इस परिषद के करीब 4 साल के कार्यकाल में पांचवा आयुक्त नगर निगम में आ गया है। इसके पूर्व के सभी चार आयुक्त के साथ महापौर और उनके साथियों की पटरी नहीं बैठी। दूसरा रिकॉर्ड यह है कि निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को सबसे छोटा कार्यकाल वाले आयुक्त के रूप में पहचाना जाएगा। भागीरथपुरा की घटना में राज्य सरकार द्वारा आयुक्त का तबादला कर दिया गया है। यह उपलब्धि भी इस परिषद के खाते में ही आएगी कि मात्र 4 महीने में किसी आयुक्त के साथ नेताओं की ऐसी जंग हो गई कि आयुक्त को जाना पड़ा।
बबलू पर उठते सवाल
नगर निगम में सुपर महापौर के रूप में पहचाने जाने वाले अभिषेक शर्मा बबलू वैसे तो महापौर परिषद के सदस्य और पानी की व्यवस्था के प्रभारी हैं। हमेशा अधिकारियों के खिलाफ तीखे स्वर में बोलने वाले बबलू को नगर निगम के हर विभाग को लेकर सारी जानकारी है। यदि जानकारी नहीं है तो केवल खुद के विभाग की नहीं है। भागीरथपुरा का इतना बड़ा घटनाक्रम हुआ और इसमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ सुर में सुर मिलाकर अधिकारियों पर निशाने लगाने वाले बबलू अपनी जिम्मेदारी बताने में पीछे रह जाते हैं। इस घटना की भी जिम्मेदारी उन्होंने खुद अपने ऊपर नहीं ली और खुद को भी अधिकारियों के समान दोषी नहीं माना। महापौर का भी सॉफ्ट कॉर्नर महापौर परिषद के अपने इस इकलौते समर्थक के साथ है।
-डॉ. जितेन्द्र जाखेटिया
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