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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

March 09, 2026


भाजपा कार्यालय से गायब हैं पदाधिकारी
नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा (Sumit Mishra) ने नगर पदाधिकारियों को फरमान सुनाया था, ताकि कार्यकर्ताओं (workers) की समस्या को सुना जा सके और उन्हें उचित फोरम तक पहुंचाया जाए। वहीं जनप्रतिनिधियों को भी कार्यालय पर बैठकर कार्यकर्ताओं से संवाद बनाना था, लेकिन आदेश निकले दो महीने होने को आ रहे हैं, किसी भी पदाधिकारी ने भाजपा कार्यालय पर जाकर कार्यकर्ताओं की बात सुनने का काम नहीं किया। सुमित मिश्रा के आगे-पीछे उनके ही पदाधिकारी नजर आते हैं और तीनों महामंत्री भी कार्यालय पहुंच जाते हैं। हालांकि इनमें सुधीर कोल्हे और महेश कुकरेजा लगातार कार्यालय में दिख जाते हैं, लेकिन उनके मुकाबले पिपले की उपस्थिति कम है। चूंकि अभी आजीवन सहयोग निधि का काम चल रहा है, इसलिए मिश्रा भी सख्ती करने के मूड में नहीं हैं। बाद में जरूर उन्होंने इस मामले में ध्यान देने का मन बनाया है।

मुखर हुए ठाकुर साब
भाजपा से कांग्रेस में गए ठाकुर साब भाजपा के खिलाफ इस बार विधानसभा में कुछ ज्यादा ही मुखर नजर आए हैं। ठाकुर साब हैं तो बदनावर के विधायक, लेकिन इंदौर की सरस्वती नदी को लेकर सवाल दागा और पूछा कि इतना पैसा खर्च करने के बाद नदी साफ क्यों नहीं हुई। यही नहीं, उन्होंने ग्लोबल समिट और अपराध को लेकर भी प्रश्न दागे और सरकार का कठघरे में खड़े किया। जिस सरकार के ठाकुर साब कभी झंडाबरदार होते थे, उसी के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर राजनीतिक हल्कों में खूब चर्चा रही। खैर, ठाकुर साब का निशाना सटीक बैठा है।


  • वसूली की खबर आम है
    भाजपा के एक मंडल स्तर के पदाधिकारी आजीवन सहयोग निधि की आड़ में अपने लिए भी सहयोग निधि (चंदा) इक_ा करते देखे जा रहे हैं। कभी एक विधायक के खास होने वाले नेताजी अब दूसरे विधायक के खास हैं और इस आड़ में आजीवन सहयोग निधि की राशि इक_ा की जा रही है। शहर के एक बड़े व्यावसायिक क्षेत्र में रहने वाले नेताजी के बारे में उनकी ही पार्टी के लोग मुखबिरी कर रहे हैं कि किस तरह से युवा नेता चंदा इकट्ठा करने में साम, दाम, दंड, भेद का उपयोग कर रहे हैं।

    जिराती का सपना कब पूरा होगा?
    पूर्व विधायक जीतू जिराती फिलहाल फुरसत में हैं और उनके प_ों को भी नगर भाजपा में कोई जवाबदारी नहीं मिली है। इसका विरोध दीनदयाल भवन में नजर आ चुका है। अब जब उस्ताद को ही कोई पद नहीं मिला है तो फिर चेलों की क्या बिसात। इसलिए चेले भी चुप हैं और जीतू सबको दिलासा दे रहे हैं कि सबकुछ अच्छा होने वाला है। चेले भी यह कहकर विरोधियों के सामने अपना सीना ऊंचा कर रहे हैं कि भिया आईडीए की कुर्सी ही लेकर आएंगे। हालांकि जिराती की ये दौड़ यहीं तक सीमित नहीं है। जिराती एक बार फिर विधायक बनने का सपना देख रहे हैं। परिसीमन में राऊ विधानसभा दो हिस्सों में बंटना है। मधु वर्मा तो यहां अंगद के पैर की तरह जम गए हैं और जो बचेगा वो जिराती के हाथ आएगा। बस राऊ दो विधानसभा में बंट जाए और जीतूभाई का सपना पूरा हो जाए।

    साब जब पॉवर में थे तो उनके आसपास प्रदेश के नेताओं की भीड़ लगती थी। हालांकि अब वे पॉवर में नहीं हैं। पिछले दिनों उनकी माताजी का निधन हो गया था। जाहिर है नेताओं को उनके यहां दु:ख प्रकट करने जाना था। जिनको जाना था, वे गए और चुपचाप आ गए। साब पॉवर में होते तो फेसबुक पर वाहवाही करवाने की लाइन लग जाती।
    -संजीव मालवीय

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