
नई दिल्ली. सौरभ दास (Saurav Das) यानी कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष नेता (CJP leader) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर की है। दरअसल, उन्होंने शीर्ष न्यायालय की तरफ से सोमवार को हवाई जहाज का टिकट बढ़ने संबंधी की गई बात पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि यही सिस्टम है कि जिसकी वजह से वो कॉकरोच बने हैं। फिलहाल, CJP ने अगले कदम का ऐलान नहीं किया है।
सौरभ दास ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर प्रकाशित खबर को साझा किया है। उन्होंने लिखा, ‘जहरीले वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं? सांस मत लो। सड़कों पर गड्ढे हैं? चलो मत। पेट्रोल के दाम ज्यादा हैं? निजी वाहन मत चलाओ। पेपर लीक का सामना कर रहे हो? परीक्षा मत दो। मीडिया समाज को बांट रहा है? टीवी मत देखो। फर्जी बाबा धर्म के साथ खेल रहे हैं? उनके पास मत जाओ। बेरोजगारी है? नौकरी मत खोजो। यह वही सिस्टम है, जिसने हमें कॉकरोच बना दिया है।’
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है। दास इससे पहले भी अदालत के फैसलों पर आपत्ति जता चुके हैं और तंज कसते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने लिखा था, ‘याद रखें कि हमारे पास ऐसे जज भी हैं, जो सरकार के मनमाने और अनुचित इस्तेमाल पर लगाम लगाने के बजाए और कानून के बजाए निजी पूर्वाग्रहों के आधार पर फैसले देने और उपदेश देने में भरोसा रखते हैं। यह हमारे देश पर बड़ा धब्बा है और जो लोग संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।’
सुप्रीम कोर्ट के बयान पर तंज
दरअसल, त्योहारी सीजन के मद्देनजर हवाई किराया में 700 फीसदी तक बढ़ोतरी का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इसपर कहा कि हवाई यात्रा न करें। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ए सिंह की बेंच ने हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी के खिलाफ दाखिल याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
एडवोकेट अभिनव ने पीठ से याचिका पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि किराया 700 फीसदी तक बढ़ गया है। उन्होंने तर्क दिया कि हवाई यात्रा एक जरूरी सेवा है और किराए में इतनी भारी बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है। जस्टिस नाथ ने जल्द सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार करते हुए कहा कि ‘हवाई यात्रा न करें।’
कोर्ट में यह अर्जी हवाई किराए को नियंत्रित करने की मांग को लेकर पहले से लंबित एस लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका में दाखिल की गई है। उन्होंने एल्गोरिदम-आधारित डायनेमिक प्राइसिंग, अचानक टिकट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और अन्य अतिरिक्त शुल्कों के खिलाफ जनहित याचिका पहले ही दायर कर रखी है, जो अभी लंबित है।
कीमतें बढ़ीं
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में खबर का हवाला देते हुए कहा गया कि दीवाली से पहले कई प्रमुख घरेलू रूटों पर हवाई किराया सामान्य स्तर से 2 से 7 गुना तक बढ़ गया। अर्जी के अनुसार दिल्ली-कोलकाता का टिकट, जो आमतौर पर 10,000 से 11,000 रुपये का होता है, 6 नवंबर की यात्रा के लिए 78,694 रुपये तक पहुंच गया। याचिकाकर्ता ने एक ही दिन और एक ही रूट पर चलने वाली उड़ानों के किराए में भारी अंतर की ओर भी ध्यान दिलाया है।
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