
नई दिल्ली। आज 27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat ) का शुभ और दुर्लभ संयोग बना है। शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना के साथ शनिदेव (Shani Dev) की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए इस व्रत से जीवन के कष्ट दूर होने के साथ सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है।
शनि प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह तिथि शनिवार को पड़ती है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है और इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा करने से ग्रह दोष शांत होते हैं तथा शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है। साथ ही आयु, धन, सुख और जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल सबसे शुभ माना गया है।
– प्रदोष काल: शाम 7:04 बजे से रात 9:06 बजे तक
– अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 1:21 बजे से 2:26 बजे तक
पूजा की विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लें। प्रदोष काल में सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
भगवान शिव को सफेद चंदन, सफेद पुष्प, भांग, धतूरा, अक्षत और शमी पत्र अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय और नंदी महाराज का स्मरण करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ मंत्र का जाप करें। अंत में भगवान शिव की आरती कर घर में बनी शुद्ध खीर का भोग अर्पित करें।
व्रत पारण का समय
शनि प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन 28 जून 2026 को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। श्रद्धालु सुबह 5:49 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।
विशेष उपाय
धन और समृद्धि की कामना रखने वाले श्रद्धालु प्रदोष काल में दूध में केसर मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। वहीं, परिवार की सुख-शांति और कष्टों से मुक्ति के लिए जौ के आटे की रोटियां बनाकर गाय के बछड़े को खिलाना शुभ माना गया है।
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