
नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल (Petrol and Diesel) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी से घरों का बजट बिगड़ने लगा है. एक नए सर्वे के मुताबिक, कई ग्राहकों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट और सर्विस की कीमतें बढ़ गई हैं और वे अब घूमने-फिरने में कटौती करने की सोच रहे हैं. सर्वे में पाया गया कि 10 में से 5 ग्राहकों ने कहा कि इस महीने लगातार चार बार फ्यूल की कीमतें बढ़ने के बाद ट्रांसपोर्ट, प्रोडक्ट्स और सर्विस की कीमतें बढ़ गई हैं.
वहीं, 10 में से 7 लोगों ने कहा कि फ्यूल के बढ़ते खर्च के असर को कम करने के लिए वे गैर-जरूरी यात्राओं और घूमने-फिरने में कटौती करेंगे. इस सर्वे में भारत के 308 जिलों के घरेलू ग्राहकों से 41,000 से ज्यादा जवाब मिले. जवाब देने वालों में 62 फीसदी पुरुष और 38 फीसदी महिलाएं थीं. लगभग 42 प्रतिशत लोग टियर-I जिलों से, 31 फीसदी टियर-II से और 27 फीसदी टियर-III, टियर-IV और टियर-V जिलों से थे.
पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा
ये नतीजे सोमवार को पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में क्रमशः 2.61 रुपए प्रति लीटर और 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद आए हैं. यह दो हफ्तों से भी कम समय में तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा फ्यूल की कीमतों में किया गया चौथा बदलाव है. इस ताजा बढ़ोतरी के बाद, दिल्ली में रेगुलर पेट्रोल की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर के पार चली गई है और 102.12 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि डीजल अब 95.20 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है. 15 मई से, OMCs ने दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण बढ़ते नुकसान के बीच, पेट्रोल की कीमतों में कुल मिलाकर 7.38 रुपए प्रति लीटर और डीज़ल की कीमतों में 7.52 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है.
डेली खर्चों पर बड़ा असर
सर्वे में पता चला कि 55 फीसदी लोगों ने कहा कि हाल की बढ़ोतरी के कारण ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ गया है. 55 प्रतिशत अन्य लोगों ने कहा कि कुछ चीजों की कीमतें बढ़ गई हैं, जबकि 50 प्रतिशत ने बताया कि सेवाओं की कीमतें बढ़ गई हैं. फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी से आमतौर पर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है, जिसका बोझ अक्सर खाने-पीने की चीजों, रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान और दूसरी सेवाओं की बढ़ी हुई कीमतों के जरिए ग्राहकों पर डाला जाता है. इसका मतलब है कि जिन घरों में निजी गाड़ियों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता, उन पर भी इसका असर पड़ रहा है. हालांकि, सर्वे में यह भी बताया गया कि लगभग 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी का उनके घर के बजट पर अब तक कोई खास असर नहीं पड़ा है.
ग्राहक अपने खर्च करने के बदल रहे तरीके
फ्यूल की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए, 71 फीसदी लोगों ने ने कहा कि वे गैर-जरूरी यात्राएं और बाहर घूमना-फिरना कम कर देंगे. सर्वे में यह भी पाया गया कि 35 प्रतिशत लोग अपनी यात्राओं को एक साथ करने और यात्रा की बारंबारता को बेहतर बनाने की योजना बना रहे हैं, जबकि 29 प्रतिशत ने कहा कि वे कम खर्चीले ट्रांसपोर्ट के विकल्पों, जैसे कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार पूल करना या सस्ते ऐप-आधारित सेवाओं की ओर रुख कर सकते हैं.
29 प्रतिशत अन्य लोगों ने कहा कि वे फ्यूल के खर्च की भरपाई के लिए घर के दूसरे खर्चों में कटौती करेंगे. लगभग एक-चौथाई लोगों ने कहा कि वे यात्रा से जुड़े खर्चों को कम करने के लिए चीजों और सेवाओं के सस्ते या नजदीकी सोर्स की तलाश करेंगे, जबकि 18 प्रतिशत लोग घूमने-फिरने या दूसरे गैर-जरूरी खर्चों को टालने की योजना बना रहे हैं.
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