
कोलकाता। कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार सरकार के मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद अब मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने भी सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर की है। मुनियप्पा ने कहा कि विभागों के आवंटन में वरिष्ठता का सही तरीके से ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
मुनियप्पा को खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग दिया गया है, लेकिन वह सामाजिक कल्याण या कृषि विभाग चाहते थे। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और लंबे राजनीतिक सफर को ध्यान में रखकर विभाग बांटे जाने चाहिए थे। मुनियप्पा ने कहा कि रामलिंगा रेड्डी आठ बार विधायक चुने गए हैं और वह खुद भी आठ बार चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने कहा कि सात, छह और पांच बार जीतने वाले नेताओं की वरिष्ठता को भी संतुलित तरीके से देखा जाना चाहिए था। उनके बयान ने कांग्रेस के अंदर चल रही नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं के साथ बराबरी का व्यवहार होना चाहिए और वरिष्ठता का सम्मान जरूरी है। मुनियप्पा ने कहा कि उन्होंने पहले ही राहुल गांधी के सामने अपनी इच्छा रखी थी। उनका कहना था कि सामाजिक कल्याण विभाग मिलने पर वह गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए ज्यादा काम कर सकते थे। वहीं कृषि या सिंचाई विभाग के जरिए किसानों की बेहतर सेवा की जा सकती थी।
मुनियप्पा ने कहा कि विभागों का बंटवारा सिर्फ सरकार चलाने का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर अगले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट नहीं किया गया तो इसका राजनीतिक नुकसान हो सकता है। मुनियप्पा ने यह भी कहा कि वह पिछले 50 वर्षों से कांग्रेस के लिए जमीनी कार्यकर्ता की तरह काम करते रहे हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अपील की कि मौजूदा असंतुलन को ठीक किया जाए ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो और पार्टी मजबूत बनी रहे।
रामलिंगा रेड्डी के बाद मुनियप्पा की नाराजगी ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पहले ही कह चुके हैं कि सभी समस्याओं का समाधान बातचीत से निकाला जाएगा। लेकिन लगातार सामने आ रहे असंतोष ने सरकार की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो विपक्ष कांग्रेस सरकार को अंदरूनी खींचतान के मुद्दे पर घेर सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व नाराज नेताओं को कैसे मनाता है।
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