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होर्मुज स्ट्रेट पर बदला ट्रंप का रुख, 20% ‘रीइम्बर्समेंट फीस’ का प्रस्ताव वापस; अब खाड़ी देशों से बड़े समझौतों पर जोर

July 15, 2026

तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत ‘यूनाइटेड स्टेट्स रीइम्बर्समेंट फीस’ (United States Reimbursement Fees) लगाने के प्रस्ताव से पीछे हटने का ऐलान किया है। इसके बजाय उन्होंने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों के साथ व्यापार और निवेश समझौतों को प्राथमिकता देने की बात कही है। ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रस्तावित शुल्क को लेकर उनके प्रशासन के भीतर भी मतभेद सामने आए थे।

खाड़ी देशों से समझौतों पर रहेगा फोकस

ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया के कई नेताओं के साथ हुई सकारात्मक बातचीत के बाद उन्होंने शुल्क लगाने की योजना वापस लेने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि अब अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार और निवेश समझौते किए जाएंगे, जिससे दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

ईरान से जुड़े जहाजों पर सख्त रुख

हालांकि शुल्क लगाने का प्रस्ताव वापस ले लिया गया है, लेकिन ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना सख्त रुख बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले या ईरानी सामान ले जाने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और ऐसे जहाजों को लेकर सख्त कदम उठाए जाएंगे।



  • ट्रुथ सोशल पर क्या कहा?

    अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान को छोड़कर दुनिया के अन्य देशों के समुद्री यातायात के लिए खुला रहेगा। उन्होंने ईरान के नेतृत्व की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वहां की नीतियों ने देश को संकट की ओर धकेल दिया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित 20 प्रतिशत रीइम्बर्समेंट फीस को पूरी तरह समाप्त किया जा रहा है और इसकी जगह आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने की नीति अपनाई जाएगी। ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित निवेश समझौते लंबे समय में खाड़ी देशों और अमेरिका, दोनों के लिए लाभकारी साबित होंगे।

    क्यों बदला फैसला?

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप शुरुआत में इस शुल्क को लागू करने के पक्ष में थे। उनका तर्क था कि इससे क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई की जा सकेगी। लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर प्रशासन के भीतर ही असहमति सामने आने लगी।

    रिपोर्टों के मुताबिक, कई वरिष्ठ अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि यदि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो वैश्विक व्यापार, विशेष रूप से तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    प्रशासन के भीतर भी था विरोध

    बताया जा रहा है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार का टोल लगाने के विचार का समर्थन नहीं किया। वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी तरह के शुल्क या नियंत्रण संबंधी कदमों का विरोध किया था।

    विश्लेषकों का मानना है कि इसी आंतरिक विरोध और सहयोगी देशों की चिंताओं को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और शुल्क लगाने की योजना छोड़कर आर्थिक सहयोग के रास्ते को प्राथमिकता दी।

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