असम। पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास (Industrial Development) को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र और असम सरकार बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (Infrastructure Projects) पर तेजी से काम कर रही हैं। इसी कड़ी में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली अंडरवॉटर टनल को सबसे अहम परियोजनाओं में माना जा रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ( Himanta Biswa Sarma ) ने दावा किया है कि यह प्रोजेक्ट राज्य की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था के लिए “गेमचेंजर” साबित हो सकता है।
सीएम सरमा के अनुसार, करीब 18 हजार करोड़ रुपये की लागत से नुमालीगढ़-गोहपुर अंडरवॉटर टनल बनाई जाएगी। यह परियोजना ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे विकसित होगी और राज्य में आवाजाही को पहले से कहीं ज्यादा आसान बनाने में मदद करेगी। सरकार का मानना है कि इससे यात्रा का समय घटेगा, व्यापार बढ़ेगा और दूरदराज के इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
इसके साथ ही गुवाहाटी रिंग रोड और काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है, जिनका उद्देश्य सड़क नेटवर्क को आधुनिक बनाना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल नदी के कारण असम में कई क्षेत्रों के बीच आवागमन चुनौतीपूर्ण रहा है। नई टनल बनने से कई इलाकों के बीच दूरी और यात्रा समय में कमी आएगी। इससे न सिर्फ लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि उद्योग, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
सरकार का दावा है कि बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा और पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के आर्थिक नक्शे में मजबूत स्थिति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुवाहाटी-शिलचर एक्सप्रेसवे, नामरूप फर्टिलाइजर प्लांट और कामाख्या कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा करेंगे। सरकार किसानों, छोटे कारोबारियों और युवाओं को भी इन परियोजनाओं से लाभ मिलने की बात कह रही है।
असम सरकार के मुताबिक, बिहटा चरियाली-तेजपुर फोर लेन रोड, गुवाहाटी एयरपोर्ट से जलुकबाड़ी एलिवेटेड कॉरिडोर, सिलिगुड़ी-शिलचर एक्सप्रेस हाईवे और गुवाहाटी-तिनसुकिया एक्सप्रेस हाईवे जैसे प्रोजेक्ट्स भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, डिब्रूगढ़ को दूसरी राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
इसके अलावा शिलचर में नए एयरपोर्ट और रूपसी एयरपोर्ट को लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम जारी है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से पूर्वोत्तर भारत में आर्थिक गतिविधियां और निवेश दोनों बढ़ेंगे।
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