
नई दिल्ली । महाराष्ट्र की कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) ने अपने 4 पार्षदों के लापता होने की शिकायत पुलिस(Complaint police) दर्ज कराई है। इन पर आरोप है कि वे एकनाथ शिंदे गुट(Eknath Shinde group) शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब शिंदे गुट की शिवसेना KDMC में बहुमत के करीब पहुंच रही है। यहां कुल 122 सदस्य हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के 5 पार्षदों के समर्थन से शिंदे गुट के पास अब 53 नगरसेवक(53 corporators), जबकि उसका राज्य स्तर पर सहयोगी भाजपा के पास 50 हैं। अगर पांच MNS और चार लापता शिवसेना(Shiv Sena missing)यूबीटी) पार्षद भी शामिल हो जाएं, तो शिंदे गुट बहुमत के आंकड़े 62 तक पहुंच जाएगा।
शिवसेना (यूबीटी) के पास KDMC में कुल 11 पार्षद हैं, लेकिन इनमें से केवल 7 ने ही कोंकण प्रादेशिक आयुक्त के पास पंजीकरण कराया है। सूत्रों के अनुसार, दो नगरसेवक शिंदे गुट से संपर्क में हैं, जबकि दो अन्य (जिन्हें लापता बताया जा रहा है) स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण MNS से आए थे और अब वापस वहीं जाने की संभावना है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, ‘हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है क्योंकि हमारे पार्षद गायब हैं। हम KDMC में पोस्टर लगाएंगे। वे हमारे चिह्न पर चुने गए थे, लेकिन जीत के 24 घंटे बाद ही उन्होंने अलग रास्ता चुन लिया। वे गद्दार हैं।’
क्या ठाकरे भाइयों के बीच फिर बढ़ गया तनाव?
कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में स्थानीय शिवसेना (UBT) नेता शरद पाटिल ने शिकायत दर्ज कराई। पार्टी नेताओं के अनुसार, संपर्क से बाहर चल रहे पार्षदों में (मधुर म्हात्रे, कीर्ति ढोणे, राहुल कोट और स्वप्निल केने) शामिल हैं। हालांकि, ठाणे पुलिस के सीनियर अधिकारी ने कहा कि कोई गुमशुदगी का केस दर्ज नहीं किया गया है, क्योंकि ये नगरसेवक अपनी मर्जी से कहीं गए हुए माने जा रहे हैं। इन घटनाक्रमों से दोनों खेमों (सत्ताधारी महायुति और ठाकरे भाइयों के बीच) तनाव बढ़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) ने MNS पार्षदों के शिंदे गुट को समर्थन देने पर नाराजगी जताई है। सीनियर मनसे नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने शिवसेना (यूबीटी) को सूचित किया था कि अगर MNS ने शिंदे गुट का साथ नहीं दिया होता, तो उसके पार्षद पार्टी में शामिल हो जाते।
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