चंडीगढ़। स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के मौके पर चंडीगढ़ में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शनकारियों ने सिख कैदियों (Sikh prisoners) की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब के राज्यपाल (Governor of Punjab) के आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी हाथों में काले झंडे लेकर आगे बढ़ रहे थे। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर आंसू गैस के गोले दागे गए और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है। वहीं, स्वतंत्रता दिवस के कारण पहले से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजभवन की ओर मार्च को लेकर पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।
कौमी इंसाफ मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शनकारी पंजाब के राज्यपाल के आवास की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने और पुलिस की रोकथाम के बीच आमना-सामना होने के बाद तनाव बढ़ गया।
इसके बाद पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को राजभवन की ओर जाने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। जगतार सिंह हवारा के पिता बापू गुरचरण सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना उनका मौलिक अधिकार है। उनका दावा है कि मोर्चा तीन साल से अधिक समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहा है, लेकिन सरकार की ओर से उनकी मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला था और उन्होंने कभी बैरिकेड तोड़ने की कोशिश नहीं की। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी पुलिस के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन लगातार बैरिकेडिंग के कारण तनाव की स्थिति बन रही है।
कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से उन सिख कैदियों की रिहाई की मांग करता रहा है, जिन्हें आंदोलनकारी ‘बंदी सिंह’ कहते हैं। मोर्चे का दावा है कि कुछ कैदी अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, इसके बावजूद वे जेलों में बंद हैं।
हालांकि, इस मुद्दे से जुड़े सभी कैदियों के मामले एक जैसे नहीं हैं। अलग-अलग मामलों में सजा, अदालत के आदेश, पैरोल और रिहाई से संबंधित कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। कुछ मामलों में आतंकवाद, हत्या और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े दोषसिद्धि के मामले भी शामिल हैं। ऐसे में प्रत्येक कैदी की रिहाई संबंधित कानून, अदालत के आदेश और सक्षम प्राधिकरण के निर्णय पर निर्भर करती है।
मोर्चे की ओर से केवल स्थायी रिहाई ही नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर पैरोल की मांग भी उठाई जा रही है। बापू गुरचरण सिंह ने एक कैदी के लिए 10 दिन की पैरोल की मांग का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि संबंधित कैदी की मां गंभीर रूप से बीमार हैं और लंबे समय से बिस्तर पर हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अपनी मां से मिलने के लिए पैरोल दी जानी चाहिए।
कौमी इंसाफ मोर्चा का आंदोलन जनवरी 2023 में चंडीगढ़-मोहाली सीमा के पास शुरू हुआ था। इसके बाद से मोर्चे की ओर से कई मार्च और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
जनवरी 2025 में भी प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। उस दौरान भी चंडीगढ़ पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने उस समय अपने कई जवानों के घायल होने की जानकारी दी थी।
जुलाई में भी मोर्चे से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पंजाब में रेल रोको प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।
स्वतंत्रता दिवस के कारण चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी थी। शहर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। ऐसे में राजभवन की ओर प्रदर्शनकारियों के मार्च को देखते हुए पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर दी।
प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने की कोशिश और पुलिस की रोकथाम के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
फिलहाल घटना में कितने लोग घायल हुए, कितनी गिरफ्तारियां हुईं या पुलिस ने कितने मामले दर्ज किए, इसकी पूरी और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इन आंकड़ों की पुष्टि के बिना किसी संख्या को अंतिम तथ्य के रूप में बताना उचित नहीं होगा।
कौमी इंसाफ मोर्चा की मांग लंबे समय से चली आ रही है। दूसरी ओर प्रशासन के सामने प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती है। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस कार्रवाई के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत होती है या मोर्चा अपने आंदोलन को और तेज करता है।
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