
डेस्क: उत्तर कोरिया के खतरे के खिलाफ जिस अमेरिका पर साउथ कोरिया भरोसा करता आया था, अब वही अमेरिका पीछे हटता दिख रहा है. पेंटागन की नई रणनीति में साफ संकेत दिए गए हैं कि उत्तर कोरिया को रोकने की मुख्य जिम्मेदारी अब दक्षिण कोरिया की होगी, जबकि अमेरिका की भूमिका सीमित रह जाएगी. दक्षिण कोरिया के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी के मुताबिक, दक्षिण कोरिया अब उत्तर कोरिया के खिलाफ प्राथमिक सुरक्षा जिम्मेदारी निभाने में सक्षम है. दस्तावेज में कहा गया है कि अमेरिका जरूरी सहयोग देगा, लेकिन पहले जैसी सक्रिय भूमिका नहीं निभाएगा. यह बदलाव ऐसे वक्त में आया है जब उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण कर रहा है और परमाणु हथियारों की धमकी देता रहा है. ऐसे में अमेरिका का कदम दक्षिण कोरिया के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है.
दक्षिण कोरिया में फिलहाल करीब 28,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. ये सैनिक दशकों से उत्तर कोरिया के खिलाफ सुरक्षा की रीढ़ माने जाते रहे हैं. अब जब अमेरिका खुद कह रहा है कि उसकी भूमिका सीमित होगी, तो सवाल उठ रहा है कि संकट के वक्त वॉशिंगटन कितना साथ देगा. हालांकि दक्षिण कोरिया ने अपना रक्षा बजट इस साल 7.5 फीसदी बढ़ाया है और उसकी सेना की संख्या करीब 4.5 लाख है, लेकिन उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के सामने यह आत्मनिर्भरता अभी भी अधूरी मानी जाती है.
The Guardian की एक खबर के मुताबिक यह बदलाव ट्रंप प्रशासन की उस नीति का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसे एलायंस मॉडर्नाइजेशन कहा जा रहा है. इसका मतलब है कि अमेरिका अब अपने सहयोगियों से ज्यादा जिम्मेदारी खुद उठाने की उम्मीद कर रहा है. असल वजह यह भी है कि अमेरिका अब अपने सैनिकों को सिर्फ कोरियाई प्रायद्वीप तक सीमित नहीं रखना चाहता.
पेंटागन चाहता है कि ये फोर्सेज जरूरत पड़ने पर चीन को काबू में रखने, ताइवान की सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक के दूसरे इलाकों में भी इस्तेमाल की जा सकें. दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने भले ही बयान जारी कर कहा हो कि अमेरिका अब भी गठबंधन का मजबूत स्तंभ है, लेकिन जमीन पर हालात कुछ और कहानी कह रहे हैं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नई रणनीति में कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण का जिक्र तक नहीं है. पहले अमेरिकी नीति में उत्तर कोरिया को पूरी तरह परमाणु हथियारों से मुक्त करने की बात होती थी. अब संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका शायद उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों को खत्म करने की बजाय उन्हें मैनेज करने की नीति अपना रहा है.
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