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राजस्थान के कैथून में 5 हजार साल पुराना विभीषण मंदिर, दुनिया में केवल यहीं होती है रावण के भाई की पूजा

March 05, 2026

कोटा। राजस्थान (Rajasthan) के कोटा जिले (Kota district) के कैथून कस्बे में धुलेंडी के दिन सालाना पारंपरिक विभीषण मेला आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्य के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर (Madan Dilawar) मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और मेले का उद्घाटन किया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले 45 सालों से यह मेला होली के आसपास सात दिनों तक चलता है, जिसमें हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन प्रमुख आकर्षण होता है। आसपास के मंदिरों से देव विमान शोभायात्रा निकालकर विभीषण मंदिर पहुंचते हैं और विधिपूर्वक पूजा अर्चना के बाद सभी देव विमान मेला स्थल पर लौटते हैं। वहीं, मुख्य अतिथि द्वारा हिरण्यकश्यप के पुतले का आतिशबाजी के साथ दहन किया जाता है।

5 हजार साल पुराना मंदिर
कैथून में स्थित यह मंदिर दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ रावण के भाई विभीषण की पूजा होती है। माना जाता है कि यह लगभग पांच हजार वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि रामराज्याभिषेक के बाद विभीषण ने भगवान शिव और हनुमान जी को भारत भ्रमण कराने की इच्छा जताई थी। एक विशाल कांवड़ में उन्हें बिठाकर यात्रा पर निकले और जब कांवड़ कैथून में विश्राम के लिए जमीन पर टिकी, तो वहां रुक गए। मंदिर में विभीषण की प्रतिमा का धड़ ऊपर दिखाई देता है, जबकि शेष भाग जमीन में दबा हुआ है।


  • मेले का महत्व और इतिहास
    मेला होली के आसपास आयोजित होता है और देश का यह इकलौता स्थान है जहाँ होलिका दहन के बाद धुलेंडी पर हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन होता है। मंदिर के वर्तमान ढांचे का निर्माण करीब 1770-1821 में महाराव उम्मेदसिंह प्रथम ने करवाया था।

    मदन दिलावर का संदेश
    मुख्य अतिथि मदन दिलावर ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं और समाज में मेल-जोल बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि विभीषण जी धर्मात्मा थे और प्रभु राम के बड़े भक्त थे। अधर्म के पथ पर चल रहे अपने भाई रावण का साथ छोड़कर उन्होंने प्रभु श्री राम का साथ दिया।

    मदन दिलावर ने यह भी बताया कि मंदिर की जमीन पर पहले कब्जा किया गया था, जिसे अब केंद्र सरकार के नए वक्फ संशोधन कानून के तहत वापस हिंदू समाज को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार द्वारा मंदिरों को उनके मालिकाना हक के अनुसार जमीन के पट्टे दिए जाएंगे और मंदिरों की जमीन पर कोई अवैध अतिक्रमण नहीं कर सकेगा। भविष्य में राज्य के सभी मंदिरों की जमीन का सर्वेक्षण कर पट्टे जारी किए जाएंगे।

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