
नई दिल्ली। बॉलीवुड(Bollywood) के मशहूर डायरेक्टर(director) और हॉरर फिल्मों(horror films) के लिए जाने जाने वाले विक्रम भट्ट(Vikram Bhatt)एक बार फिर अपने निजी जीवन को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने पुराने रिश्तों, खासकर सुष्मिता सेन और अमीषा पटेल के साथ डेटिंग को लेकर खुलकर बातचीत की।
विक्रम भट्ट ने बताया कि उनके जीवन का एक दौर ऐसा भी था जब पेशेवर सफलता और निजी जीवन दोनों ही एक साथ उलझे हुए थे। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्मों ने तो सफलता हासिल की, लेकिन उनकी रिलेशनशिप्स लंबे समय तक नहीं टिक सकीं। इसी बात को मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा, “मेरी फिल्में तो चलीं, लेकिन रिलेशनशिप नहीं।”
विक्रम भट्ट और सुष्मिता सेन की मुलाकात 1996 में फिल्म ‘दस्तक’ के सेट पर हुई थी। उस समय विक्रम, महेश भट्ट को असिस्ट कर रहे थे और सुष्मिता अपने करियर की शुरुआत कर रही थीं। वहीं से दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और डेटिंग शुरू हुई, लेकिन कुछ समय बाद यह रिश्ता खत्म हो गया।
इसी तरह विक्रम भट्ट का नाम एक्ट्रेस अमीषा पटेल के साथ भी जुड़ा। दोनों ने साल 2002 से 2007 के बीच एक-दूसरे को डेट किया। हालांकि यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका।
इंटरव्यू के दौरान विक्रम भट्ट ने अपने संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब वह आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थे। उनके पास साधारण जरूरतों के लिए भी पैसे नहीं होते थे। उन्होंने कहा, “मैं स्ट्रगलिंग डायरेक्टर था, कई बार हालात ऐसे थे कि मेरे पास सीडी खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब लोग उन्हें सफल समझ रहे थे, तब भी उनकी जिंदगी आसान नहीं थी। उन्होंने कहा कि उसी दौर में वह सुष्मिता सेन जैसी बड़ी हस्ती को डेट कर रहे थे, लेकिन अंदर से वह संघर्ष कर रहे थे।
विक्रम ने आगे कहा कि उनके जीवन में जो भी लोग आए, उन्होंने कुछ न कुछ अच्छा ही दिया। उनके मुताबिक, हर रिश्ता एक सीख लेकर आया। चाहे वह प्यार हो, समय हो या जीवन का अनुभव—हर किसी ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया है।
उन्होंने अपने पुराने रिश्तों को लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई, बल्कि उन्हें सकारात्मक अनुभव बताया। विक्रम भट्ट ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें केवल प्यार और सीख ही नजर आती है। अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि असली जीत फिल्मों और मेहनत की होती है, क्योंकि वही समय के साथ लोगों को याद रहती है, जबकि निजी जीवन की कहानियां धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाती हैं।
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