
कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में इन दिनों अंदरूनी उठापटक तेज होती नजर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसदों (Member of Parliament) की दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव (Bhupender Yadav) से मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि पार्टी ने इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
भूपेंद्र यादव के आवास पर जुटे कई सांसद
दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर टीएमसी के कई सांसदों की मौजूदगी ने अटकलों को और हवा दी। इनमें पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा। हाल ही में उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी नाराजगी सार्वजनिक की थी।
इसके बाद टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर भी कुछ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के शामिल होने की चर्चा रही। वहीं सांसद काकोली घोष ने दावा किया कि कुछ सांसद राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने के पक्ष में हैं।
इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर ने उठाए सवाल
राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने टीएमसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और असहमति की आवाज को दबाए जाने जैसे मुद्दों को लेकर खुलकर नाराजगी जताई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक पार्टी का हिस्सा रहे नेता की ओर से लगाए गए आरोपों ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।
क्या पार्टी के भीतर बढ़ रहा है असंतोष?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीते कुछ महीनों से टीएमसी के कई नेता और जनप्रतिनिधि नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से किसी बड़े संकट से इनकार किया गया है, लेकिन हाल की घटनाओं ने इन चर्चाओं को बल दिया है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व द्वारा बुलाई गई कुछ बैठकों में कई सांसदों की अनुपस्थिति ने भी सवाल खड़े किए हैं। इसे संगठन के भीतर बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
ऋतब्रत बंद्योपाध्याय की भूमिका पर भी नजर
इन घटनाक्रमों के बीच विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय का नाम भी चर्चा में है। उन्होंने दावा किया है कि टीएमसी के कई सांसद और नेता उनके संपर्क में हैं। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में चल रही अटकलों को और तेज कर दिया है। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह स्पष्ट संकेत हो सकता है कि पार्टी के भीतर असंतोष केवल सीमित स्तर तक नहीं रह गया है।
दिल्ली में एक साथ सक्रिय रहे सभी प्रमुख चेहरे
दिल्ली में उस समय ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, शुभेंदु अधिकारी और सुखेंदु शेखर रॉय जैसे कई प्रमुख राजनीतिक चेहरे मौजूद थे। ऐसे में विभिन्न बैठकों और मुलाकातों ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। इन घटनाओं को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका तैयार हो रही है या फिर यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।
फिरहाद हाकिम की मुलाकात ने बढ़ाई चर्चा
ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम की विपक्षी खेमे के नेताओं से हुई लंबी मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर हालात समझने या संभावित संवाद की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
ममता की चुप्पी भी बनी चर्चा का विषय
दिल्ली दौरे के दौरान ममता बनर्जी ने मीडिया से अपेक्षाकृत दूरी बनाए रखी। आमतौर पर अपने तीखे राजनीतिक बयानों के लिए चर्चित रहने वाली ममता की इस चुप्पी को भी कई राजनीतिक पर्यवेक्षक महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
आगे क्या?
फिलहाल बंगाल की राजनीति एक महत्वपूर्ण मोड़ पर दिखाई दे रही है। एक तरफ टीएमसी नेतृत्व स्थिति को सामान्य बता रहा है, वहीं दूसरी ओर लगातार सामने आ रही राजनीतिक गतिविधियां अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि पार्टी के भीतर उठ रही असहमति केवल दबाव की राजनीति है या फिर यह किसी बड़े राजनीतिक पुनर्संयोजन की शुरुआत। फिलहाल पश्चिम बंगाल की सियासत पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
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