नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के एक बेहद रहस्यमयी भूमिगत ठिकाने पिकैक्स माउंटेन को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका इस ठिकाने पर जल्द हमला कर सकता है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर यह पहाड़ इतना महत्वपूर्ण क्यों है और अमेरिका के लिए इसे निशाना बनाना इतना मुश्किल क्यों माना जाता है?
पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत परिसर माना जाता है। यह ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र नतांज के बेहद करीब स्थित है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पहाड़ के अंदर बनाई गई सुरंगों और भूमिगत ढांचे की गहराई इसे सामान्य हवाई हमलों से काफी हद तक सुरक्षित बना सकती है।
पिकैक्स माउंटेन का आधिकारिक नाम Kuh-e Kolang Gaz La बताया जाता है। ‘Kolang’ शब्द का अर्थ पिकैक्स यानी चट्टान तोड़ने वाला औजार होता है। इसी वजह से इसे पिकैक्स माउंटेन कहा जाता है।
यह पहाड़ी समुद्र तल से करीब 1,600 मीटर की ऊंचाई पर है और तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नतांज परमाणु परिसर से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर है।
यह कोई सामान्य पहाड़ी नहीं है। इसके भीतर जमीन के काफी नीचे सुरंगों और भूमिगत हॉल का बड़ा नेटवर्क होने की जानकारी सामने आई है। सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में कम से कम चार सुरंगों के प्रवेश द्वार दिखाई दिए हैं। माना जाता है कि ये सुरंगें पहाड़ के भीतर बने एक बड़े भूमिगत परिसर तक जाती हैं।
इस परिसर की गहराई जमीन से कम से कम 100 मीटर नीचे होने का अनुमान लगाया गया है। यही गहराई इसे अमेरिका के लिए चुनौतीपूर्ण लक्ष्य बनाती है।
पिकैक्स माउंटेन का संबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़ा जाता है। अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र पर नजर रखता रहा है। इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के अनुसार, यहां निर्माण कार्य 2020 में शुरू हुआ था।
ईरान ने उस समय बताया था कि पहाड़ के भीतर बनाए जा रहे हॉल का इस्तेमाल उन्नत सेंट्रीफ्यूज बनाने के लिए किया जाएगा। सेंट्रीफ्यूज ऐसी मशीनें हैं जिनका इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन में किया जाता है।
हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि यह भूमिगत परिसर पूरी तरह ऑपरेशनल हो चुका है या नहीं। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर विशेषज्ञों का आकलन है कि यहां निर्माण कार्य जारी रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने इन दावों को खारिज किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 22 जुलाई 2026 को कहा था कि पिकैक्स माउंटेन में कोई परमाणु गतिविधि नहीं चल रही है।
पिकैक्स माउंटेन की अहमियत इसकी नतांज से नजदीकी और भूमिगत संरचना की वजह से बढ़ जाती है। नतांज ईरान का प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र है और पहले भी ईरान के परमाणु ठिकाने अमेरिकी और इजरायली हमलों का निशाना बन चुके हैं।
लेकिन पिकैक्स माउंटेन अब तक बड़े हमलों से बचा रहा। इसकी संभावित वजह इसकी गहराई, पहाड़ी संरचना और मजबूत भूमिगत सुरक्षा मानी जाती है।
ट्रंप जुलाई में भी इस जगह को लेकर संकेत दे चुके थे। अब 4 सितंबर को उन्होंने दोबारा कहा कि अमेरिका पिकैक्स माउंटेन को जल्द निशाना बना सकता है।
यही सबसे बड़ा सवाल है। बंकर-बस्टर बमों को जमीन के नीचे मौजूद मजबूत सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है। अमेरिका के पास GBU-57 जैसे बेहद शक्तिशाली भूमिगत ठिकाना भेदने वाले बम हैं।
लेकिन पिकैक्स माउंटेन की गहराई और पहाड़ के भीतर मौजूद संरचना के कारण यहां हमला करना आसान नहीं माना जा रहा।
रॉयटर्स के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, भूमिगत परिसर अमेरिकी बंकर-बस्टर हथियारों की प्रभावी पहुंच से भी बाहर हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि परिसर के कुछ कमजोर हिस्से या प्रवेश क्षेत्र हवाई हमले की चपेट में आ सकते हैं।
इसका मतलब यह है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो केवल एक बम गिराकर पूरे भूमिगत परिसर को तबाह कर देना आसान नहीं होगा।
पिकैक्स माउंटेन की सुरक्षा को लेकर भी कई तरह के आकलन सामने आए हैं। माना जाता है कि सुरंगों के प्रवेश वाले हिस्सों को मजबूत किया गया है। कुछ जगहों पर कंक्रीट और मिट्टी की अतिरिक्त परतें बनाए जाने की जानकारी सैटेलाइट तस्वीरों से मिलती है।
पूर्वी हिस्से की दो सुरंगों के मुहानों को आंशिक रूप से मिट्टी से ढके जाने की भी बात सामने आई है। माना जाता है कि ऐसा जमीन के रास्ते वाहनों की आवाजाही को सीमित करने के लिए किया गया होगा। हालांकि, सुरंगों को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।
नतांज में ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम लंबे समय से चल रहा था। हाल के हमलों में नतांज के ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुंचने और भूमिगत ढांचे के भी प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।
इसके मुकाबले पिकैक्स माउंटेन का भूमिगत परिसर पहले के हमलों से बचा रहा। यही वजह है कि अब यह जगह अमेरिकी रणनीतिक निगरानी और संभावित सैन्य कार्रवाई के केंद्र में आ गई है।
अगर ट्रंप वास्तव में पिकैक्स माउंटेन पर हमला करने का आदेश देते हैं, तो यह ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का एक बेहद महत्वपूर्ण चरण हो सकता है। लेकिन पहाड़ के भीतर मौजूद कथित भूमिगत ढांचे की वजह से हमले का परिणाम तत्काल और पूरी तरह स्पष्ट होना मुश्किल है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका इस ठिकाने को किस तरह निशाना बनाता है और क्या उसके पास इसे पूरी तरह निष्क्रिय करने की क्षमता है। वहीं ईरान के लिए पिकैक्स माउंटेन का रहस्य और उसकी भूमिगत संरचना अब उसकी परमाणु रणनीति को लेकर सबसे बड़े सवालों में शामिल हो गई है।
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