चेन्नई। तमिलनाडु (Tamil Nadu) में महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने वाली ‘वेट्री पायनम’ (Vetri Payanam) योजना अब कानूनी विवाद में फंस गई है। इरोड की महिला निजी बस ऑपरेटर एन. कलामणि (N. Kalamani) ने इस योजना की संवैधानिक वैधता को मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) में चुनौती दी है। उन्होंने अदालत से योजना को असंवैधानिक घोषित करने के साथ ही अंतिम फैसला आने तक इस पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। याचिका पर 5 अक्टूबर को हाईकोर्ट की पहली पीठ में सुनवाई सूचीबद्ध है।
यह योजना मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने 2 अक्टूबर को विस्तारित रूप में शुरू की थी। इसके तहत राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई है। योजना के विस्तार के बाद एक्सप्रेस, लिमिटेड स्टॉप सर्विस, डीलक्स और अन्य सेवाओं को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार इससे प्रतिदिन करीब 84.32 लाख महिलाएं लाभान्वित होंगी।
इरोड जिले की भदानी तालुका निवासी एन. कलामणि ने अपनी याचिका में कहा है कि वह विधवा हैं और अपनी दो बेटियों के साथ करीब 15 कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका इसी बस कारोबार से चलाती हैं। उनके पास दो रूटों पर बस संचालन का परमिट है।
इनमें इरोड से वैल्लीथीरुप्पुर तक 47 किलोमीटर और काकापल्यम से अंधियूर तक 88 किलोमीटर का मार्ग शामिल है। कलामणि का कहना है कि इन रूटों पर सरकारी बसों में महिलाओं के लिए किराया खत्म होने से निजी बसों के यात्रियों की संख्या तेजी से घट सकती है।
कलामणि का तर्क है कि सरकारी बसों में महिलाओं का किराया नहीं लगने का फायदा केवल महिला यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवार के पुरुष सदस्य भी उनके साथ यात्रा करते हैं, इसलिए पूरा परिवार सरकारी बस को प्राथमिकता दे सकता है। इससे निजी बसों को महिला यात्रियों के साथ-साथ पुरुष यात्रियों का भी नुकसान हो सकता है।
याचिकाकर्ता ने इसे सरकारी और निजी बस ऑपरेटरों के बीच समान प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत के खिलाफ बताया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार का भी हवाला दिया है।
याचिका में दावा किया गया है कि वेट्री पायनम योजना के तहत महिलाओं के मुफ्त सफर की भरपाई के लिए राज्य सरकार परिवहन निगमों को सालाना करीब 6,000 करोड़ रुपये देती है। निजी बस ऑपरेटरों के संगठन ने इसी तर्ज पर निजी बसों को भी योजना में शामिल करने और उन्हें भी मुआवजा देने की मांग की थी।
याचिका के मुताबिक, निजी बस ऑपरेटरों के संगठन ने 22 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री से इस संबंध में अनुरोध किया था, लेकिन उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
कलामणि ने अपनी याचिका में दावा किया है कि केवल सरकारी बसों में महिलाओं से किराया नहीं लिया जाना निजी परिवहन क्षेत्र के लिए असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा करता है। उन्होंने मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 और तमिलनाडु मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 के कुछ प्रावधानों का भी हवाला दिया है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि योजना की घोषणा विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा नियम 110 के तहत की गई थी और इसे लेकर अलग से सरकारी आदेश जारी नहीं किया गया। इसी आधार पर उन्होंने 24 अगस्त 2026 को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) की ओर से जारी घोषणा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।
‘वेट्री पायनम’ दरअसल पिछली डीएमके सरकार की ‘विदियाल पायनम’ योजना का विस्तारित रूप है। पहले यह सुविधा मुख्य रूप से साधारण शहर और नगर बसों तक सीमित थी। अब इसका दायरा बढ़ाकर अधिक श्रेणी की सरकारी बसों तक किया गया है। 2 अक्टूबर से शुरू हुए विस्तारित चरण में राज्य की सात परिवहन निगमों की 12,695 बसें रोजाना करीब 1,68,500 ट्रिप संचालित कर रही हैं।
अब इस योजना की संवैधानिक वैधता और निजी बस ऑपरेटरों की आपत्तियों पर मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। अदालत का रुख यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा देने वाली इस विस्तारित योजना पर आगे क्या कानूनी स्थिति बनती है।
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