
नेता-नेता (Leader)को मार रहे हैं और लोग दोनों की लड़ाई ताड़ रहे हैं… शहर से लेकर प्रदेश (State) और प्रदेश से लेकर देश तक का यह आलम है कि जिसका जोर है वो जोरदार नजर आ रहा है… विरोधियों (Opponents) को ताड़-ताडक़र मार रहा है… कुछ मजबूरी में लड़ रहे हैं… कुछ मगरूरी में भिड़ रहे हैं और कुछ दूरी बनाकर भाग रहे हैं… केंद्र की सरकार बड़े नेताओं को निशाना बना रही है… राहुल को पप्पू बनाने-मनवाने में जोर लगा रही है… राजनीति में पैदा हुए केजरीवाल का बचपन में ही गला घोंट दिया… ममता से बंगाल छीनने में पूरा प्लान बना लिया… दीदी को सीबीआई से लेकर ईडी का तोहफा थमा दिया… वो वोटरों के नाम कटने से परेशान हैं और कांग्रेसी विपक्ष की घटती ताकत देखकर हैरान हैं… ऊपर वाले अपना काम दिखा रहे हैं और नीचे वाले अलग किला लड़ा रहे हैं… इस मारधाड़ का सडक़छाप सीन दो दिन पहले इंदौर में नजर आया, जब विपक्ष की भूमिका निभाते हुए चीखते-चिल्लाते, धरना प्रदर्शन कर अपना अस्तित्व बचाते कांग्रेसियों का विरोध करने भाजपाई जा पहुंचे…उनकी पहुंच की हद यह हुई कि वह किसी प्रदर्शन में नहीं भिड़े, बल्कि कांग्रेसियों के कार्यालय यानी घर तक जा पहुंचे… इस मारधाड़ में कांग्रेसियों के हाथ-पैर सुजाने की पूरी तैयारी थी… पहले पुलिस ने कांग्रेस कार्यालय पर जाकर जांच कर ली कि कहीं लाठी-पत्थर तो नहीं हैं… फिर भाजपाइयों को बुलावा भेज दिया…थकी सेना पर पलटवार करने पहुंचे भाजपाइयों ने पुलिस को धकेला और अपना हाथ खोला… लेकिन मरता क्या न करता की मजबूरी में कांग्रेसियों ने भी दो-दो हाथ कर लिए… जिधर से पत्थर आए, उधर पहुंचाए… पानी की बोतल से भी हाथ आजमाए और माहौल फिल्मी हो गया… इस लाग-लपेट में बीच में घुसे पत्रकार भी कहीं पत्थरों का स्वाद चखते देखे गए तो कहीं बोतल के पानी से अभिषेक करते नजर आए… कुल मिलाकर न तू जीता न मैं हारा की तर्ज पर आधे भाजपाई सुजाए तो आधे कांग्रेसियों ने हाथ-पैर तुड़वाए… हर तरह कीर्तिमान बनाने वाले इंदौर शहर ने सत्तापक्ष और विरोधियों के इस सडक़ संग्राम का भी कीर्तिमान बना लिया… लोगों के समझ में यह नहीं आया कि विरोध करना, प्रदर्शन करना, रोना-पीटना तो कांग्रेसियों की अस्तित्व बचाने की अपनी मजबूरी है, लेकिन भाजपाइयों का कांग्रेस कार्यालय पर पहुंचना न केवल मगरूरी बल्कि नादानी और नासमझी भी है… पिछले बीस बरस से सत्ता से हाथ धोए बैठे कांग्रेसी बेचारे वैसे ही मरे पड़े थे, लेकिन उनके विरोध के हवन में घी डालने भाजपाई पहुंच गए और यज्ञ की पूर्णाहुति करवा आए… जिनका नाम नहीं था, उनका काम हो गया और जिनका नाम था, वो बदनाम हो गया… इस नौसिखिया नेतागीरी का अंजाम-परिणाम चाहे जो रहा… लेकिन लोगों को जहां इस सडक़ संग्राम का आनंद आया… वहीं कांग्रेसियों को अपना दम दिखाने, एकजुटता बताने और लाठियां खाकर डकार पाने का मौका मिल गया…
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