
उज्जैन। नाग पंचमी और सावन के सोमवार के संयोग पर सोमवार को उज्जैन में श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि शहर की व्यवस्थाएं कई जगह चरमरा गईं। प्रशासन ने करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया था, लेकिन भीड़ 12 लाख से अधिक पहुंच गई।
लाखों लोगों की इस भीड़ के बीच एक समय हरसिद्धि चौराहे पर भगदड़ जैसे हालात बन गए। लाइन में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी फंस गए। धक्का-मुक्की में कई लोगों के दबने और बेहोश होने की स्थिति बनी। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाल ली, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। मामला सिर्फ भीड़ का नहीं, बल्कि गलत दिशा में पहुंची भीड़ और एग्जिट व्यवस्था के अभाव का भी था। जिन लोगों को बाबा महाकाल के सामान्य दर्शन करने थे, वे कर्कराज पार्किंग से नागचंद्रेश्वर दर्शन की कतार में लग गए। लाइन में आगे बढ़ते-बढ़ते जब वे हरसिद्धि पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि वे गलत कतार में आ गए हैं। इसके बाद न तो आसानी से बाहर निकलने का रास्ता मिला और न ही पुलिस ने उन्हें लाइन से निकलने दिया।
लाइन रोकी तो टूटे बैरिकेड, मची अफरा-तफरी …
भीड़ बढऩे पर प्रशासन ने कुछ समय के लिए लाइन रोक दी। इससे पीछे खड़े श्रद्धालुओं में नाराजगी और बेचैनी बढ़ गई। हरसिद्धि चौराहे पर लोगों ने बैरिकेडिंग को धक्का देकर आगे बढऩे की कोशिश की। देखते ही देखते धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। भीड़ में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी फंस गए। कुछ लोग दबाव में नीचे गिर गए और कुछ के बेहोश होने की स्थिति बनी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल मोर्चा संभाला। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई और अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा गया। काफी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया गया। घटना के दौरान मौके की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। इसके बाद शहर ही नहीं, बाहर मौजूद लोगों में भी यह चर्चा फैल गई कि उज्जैन में कोई बड़ा हादसा हो गया है। कई लोग अपने परिजनों की जानकारी लेने के लिए फोन करने लगे। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति की ओर से श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभाली और धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई।
6-7 घंटे बाद पता चला, गलत लाइन में लग गए…
कर्कराज पार्किंग से दर्शन व्यवस्था के लिए बनाई गई कतारों में स्पष्ट संकेतक और बड़े होर्डिंग पर्याप्त नहीं होने से श्रद्धालुओं को यह समझने में परेशानी हुई कि कौन सी लाइन नागचंद्रेश्वर के लिए है और कौन सी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए। कई श्रद्धालु घंटों तक इसी भ्रम में लाइन में चलते रहे। करीब 6 से 7 घंटे बाद हरसिद्धि क्षेत्र में पहुंचने पर उन्हें पता चला कि वे जिस कतार में खड़े हैं, वह नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए है। इसके बाद लोगों में बेचैनी बढ़ गई। परिवारों के साथ आए श्रद्धालु वापस लौटना चाहते थे, लेकिन भीड़ और बैरिकेडिंग के कारण निकलने का रास्ता नहीं था। बिंदु की पहले से स्पष्ट योजना बनानी होगी।
लैंड पूलिंग का विरोध खत्म हुआ, अब पुराने तरीके से कैंप लगेंगे….
सिंहस्थ को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार मेला क्षेत्र और तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। वे अधिकारियों को भोपाल बुलाकर बैठकों में व्यवस्थाओं की जानकारी ले रहे हैं। सिंहस्थ क्षेत्र को शहर से बाहर व्यवस्थित करने और भीड़ का दबाव शहर के अंदर कम करने के उद्देश्य से लैंड पूलिंग योजना लाई गई थी। विरोध के बाद सरकार ने इस योजना को निरस्त कर दिया। अब पुराने तरीके से ही सिंहस्थ के कैंप और व्यवस्थाएं किए जाने की तैयारी है। सोमवार की भीड़ ने प्रशासन को एक तरह से सिंहस्थ से पहले बड़ा अलर्ट दे दिया है। 12 लाख की भीड़ में जब गलत लाइन में जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बाहर निकलने का रास्ता नहीं रहा और कुछ मिनटों की धक्का-मुक्की से भगदड़ जैसे हालात बन गए, तो करोड़ों की संभावित भीड़ के सामने ऐसी गलती की गुंजाइश और भी खतरनाक होगी। सिंहस्थ में भीड़ कई गुना ज्यादा होगी। इसलिए अभी से ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिसमें श्रद्धालु गलत कतार में जाए ही नहीं और अगर चला भी जाए तो उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने का रास्ता मिले। सोमवार की घटना को सिर्फ एक दिन की अव्यवस्था मानकर भूलना भारी पड़ सकता है।
सवाल सिर्फ सोमवार की भीड़ का नहीं, सिंहस्थ की तैयारी का है….
सोमवार की घटना ने आने वाले सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अभी तो एक दिन में करीब 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ में व्यवस्था दबाव में आ गई। सिंहस्थ के दौरान जब करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे और पर्व स्नान के दिनों में एक साथ बड़ी संख्या में लोग शहर में प्रवेश करेंगे, तब इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना और सुरक्षित तरीके से दर्शन व स्नान कराना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इस घटना से साफ है कि सिर्फ बैरिकेडिंग और पुलिस बल बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। भीड़ कहां से आएगी, किस रास्ते से जाएगी, किस कतार में लगेगी और जरूरत पडऩे पर कहां से बाहर निकलेगी।
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