इंदौर

300 टन मलबा रोजाना निकलने लगा इंदौर में

अनलॉक के बाद बढ़ गई निर्माण गतिविधियां… ईंट, मेन होल के ढक्कन…इंटरलॉकिंग टाइल्स बना रहे हैं मलबे से
इंदौर।  निगम  (corporation) का कहना है कि शहर में चूंकि निर्माण गतिविधियां ( construction activities) अनलॉक (Unlock) के बाद फिर तेजी से शुरू हो गई है, जिसके चलते मलबा (debris) भी ज्यादा निकलने लगा है। औसतन रोजाना 300 टन मलबा निकल रहा है, जिसके चलते निगम ने जो देवगुराडिय़ा स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड पर मलबे से ईंट, मेन हॉल के ढक्कन, इंटरलॉकिंग और अन्य सामग्री बनाने का संयंत्र लगाया है उसकी क्षमता भी 5 गुना तक बढ़ाई जा रही है। अभी 100 टन रोज की ही क्षमता इस संयंत्र की है।

नगर निगम (municipal Corporation)  ने जहां 5 तरह का कचरा अलग-अलग एकत्रित करना शुरू किया, वहीं उसका इस्तेमाल भी अलग-अलग तरीके से किया जा रहा है। कचरे से खाद बनाने के अलावा डीजल, बायो गैस और मलबे से अन्य सामग्री तैयार की जा रही है। निगम ने अब यह भी तय किया है कि सीएनडी वेस्ट यानी कंस्ट्रक्शन और डिमॉलिशन से संबंधित मलबा अगर किसी व्यक्ति ने इधर-उधर फेंका तो उस पर स्पॉट फाइन न्यूनतम 5 हजार रुपए का ठोंका जाएगा। वहीं निगम (corporation) ने यह सुविधा भी निर्माण से जुड़े लोगों को दी है कि वे अपने मलबे के निपटान के लिए इंदौर-311 मोबाइल के माध्यम से निगम को सूचना दे सकते हैं और इसके लिए जो निर्धारित शुल्क है उसे चुकाकर यह मलबा (debris) उठवाया जा सकता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत इंदौर निगम (corporation) के सलाहकार असद वारसी के मुताबिक शहर में निर्माण मलबे से ईंट, मेन हॉल ढक्कन, इंटरलॉकिंग टाइल्स और अन्य सामग्री बनाई जा रही है। अभी जो संयंत्र निजी क्षेत्र की सहायता से लगवाया है उसमें रोजाना 100 टन मलबे से ये सामग्री बन रही है। मगर चूंकि शहर में लगातार मलबा बढ़ रहा है, लॉकडाउन में चूंकि निर्माण संबंधी गतिविधियां ठप रही है और अब अनलॉक के बाद निजी आवास से लेकर अन्य तरह की निर्माण यानी कंस्ट्रक्शन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ गई है, जिसके चलते 300 टन औसतन निर्माण मलबा हर रोज निकल रहा है। लिहाजा इस संयंत्र की क्षमता 5 गुना बढ़ाकर 500 टन रोजाना की की जा रही है। वहीं निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि स्वच्छता पर दाग लगाने वालों यानी इधर-उधर कचरा फेंकने वालों को चिन्हित किया जाए। खासकर मलबा (debris) फेंकने वालों से न्यूनतम 5 हजार रुपए का स्पॉट फाइन वसूल किया जाए। सभी भवन अधिकारियों-निरीक्षकों और दरोगाओं को भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति नए निर्माण करने से पहले पुराने निर्माण को तोड़ता है तो निकलने वाला मलबा खुले मैदानों, खाली भूखंडों या अन्य स्थानों पर अनाधिकृत रूप से नहीं फेंका जाए। बजाय इसके निगम को सूचना दे और निर्धारित शुल्क जमा करवाकर यह मलबा (debris) उठवा सकता है। हालांकि कई लोग ट्रैक्टर ट्रालियों की मदद से निजी ठेकेदारों से भी मकान तुड़ाई और उसके बाद मलबा उठवा लेते हैं। दरअसल पुराने निर्माणों को तोडऩे का ठेका भी शहर में कई लोग लेते हैं और उन्हीं की जिम्मेदारी रहती है कि तोड़े गए निर्माण में से उपयोगी सामग्री को अलग कर शेष मलबे का निपटान भी करेंगे। मगर ये लोग भी इधर-उधर मलबा (debris) पटक देते हैं, उन पर अब निगम (corporation) निगाह रखेगा।

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