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पहली बार गणतंत्र दिवस में दो विदेशी नेता होंगे मुख्य अतिथि, भारत‑विदेश संबंधों में यह नई मिसाल

October 29, 2025

नई दिल्‍ली । भारत ने आगामी गणतंत्र दिवस 2026(Republic Day 2026) के लिए एक ऐतिहासिक फैसला(Historic decision) लिया है। इस बार यूरोपीय संघ (European Union) के शीर्ष नेतृत्व यानी यूरोपीय आयोग(European Commission) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के दो प्रमुख नेता एक साथ भारत के इस प्रतिष्ठित समारोह में शिरकत करेंगे। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा जनवरी 2026 में नई दिल्ली पहुंचेंगे, जो भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकेत है।


  • सूत्रों के हवाले से लिखा है कि औपचारिक निमंत्रण और स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नई दिल्ली और ब्रसेल्स द्वारा इस संबंध में औपचारिक घोषणा जल्द की जाएगी। गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में किसी नेता को आमंत्रित करना भारत सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनयिक और प्रतीकात्मक कदम माना जाता है। यह चयन केवल औपचारिक नहीं होता, बल्कि इसके पीछे भारत की रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक प्राथमिकताएं होती हैं।

    भारत का गणतंत्र दिवस, जो हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है, देश के संविधान लागू होने की याद दिलाता है। 1950 से अब तक, भारत ने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है, जो वैश्विक मित्रता का प्रतीक होता है। 2025 के समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो मुख्य अतिथि थे, जो भारत-इंडोनेशिया साझेदारी को मजबूत करने का उदाहरण था। लेकिन 2026 में ईयू नेताओं की मेजबानी एक नया अध्याय खोलेगी।

    भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में नई ऊंचाई

    भारत और 27 सदस्य देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच हाल के महीनों में रिश्तों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इस वर्ष फरवरी में EU के कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स की भारत यात्रा के बाद से द्विपक्षीय संवाद में तेजी आई है। 20 अक्टूबर को EU ने एक नया रणनीतिक एजेंडा पारित किया है, जिसका उद्देश्य भारत के साथ संबंधों को नई ऊंचाई तक ले जाना है। इसमें मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को अंतिम रूप देना, तकनीकी, रक्षा, सुरक्षा, और जनसंपर्क के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना शामिल है।

    जब EU के नेता जनवरी में भारत आएंगे, तो उसी दौरान नई दिल्ली में भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जो मूल रूप से 2026 की शुरुआत में होना था। इससे यह तय हो गया है कि दोनों पक्षों के बीच FTA वार्ता को दिसंबर तक पूरा करना होगा।

    FTA वार्ता में प्रगति

    वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल वर्तमान में बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हैं, जहां वे EU के ट्रेड कमिश्नर मारोस शेफकोविक से बातचीत कर रहे हैं। शेफकोविक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हम गहन और विस्तृत चर्चा कर रहे हैं। व्यापार और निवेश समझौते के माध्यम से संबंधों को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है।”

    जानकारी के अनुसार, भारत-EU FTA के 23 अध्यायों में से लगभग आधे अध्यायों पर सहमति बन चुकी है, जबकि शेष विषय- कृषि, वाइन, ऑटोमोबाइल, बीमा और बैंकिंग पर वार्ता जारी है।

    उच्च स्तरीय संवाद जारी

    EU की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन और एंटोनियो कोस्टा हाल के महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दो बार बात कर चुके हैं, जिसमें एक वार्ता 17 सितंबर (प्रधानमंत्री के जन्मदिन) को भी हुई। दोनों नेता दक्षिण अफ्रीका में नवंबर में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी मिलने वाले हैं।

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी 20-21 नवंबर को ब्रसेल्स में इंडो-पैसिफिक फोरम में भाग लेंगे, जबकि EU की हाई रिप्रेजेंटेटिव काया कल्लास दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 की शुरुआत में भारत आने वाली हैं।

    अमेरिका की अनिश्चितता के बीच भारत-EU साझेदारी मजबूत

    रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद जैसे मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद, नई दिल्ली का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझा हित कहीं अधिक हैं। अमेरिका की नीति अनिश्चितता ने भारत और यूरोप दोनों को एक-दूसरे के प्रति और अधिक आकर्षित किया है।

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