
नई दिल्ली। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान(Pakistan) के लिए मुश्किलें(difficulties) कम होने का नाम नहीं ले रहीं… पहले कर्ज वापसी(debt repayment) और अब बड़े निवेशक के बाहर निकलने की तैयारी(now—the impending exit of a major investor)United Arab Emirates का यह कदम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था(Pakistan’s economy) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
यूएई की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी(UAE’s telecom giant) e& (पूर्व नाम एतिसलात)(formerly known as Etisalat), पाकिस्तान के टेलीकॉम सेक्टर से बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रही है… कंपनी के पास PTCL में 26% हिस्सेदारी है और लंबे समय से मैनेजमेंट कंट्रोल भी उसी के पास है… अब संकेत मिल रहे हैं कि कंपनी अपने शेयर बेचकर इस बाजार से बाहर निकल सकती है…
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस ले लिया… यह वही राशि थी जिसे सालों से रोलओवर किया जा रहा था, ताकि पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव न पड़े… लेकिन अचानक भुगतान की मांग ने पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति को और झटका दिया।
इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू हैकरीब 20 साल पुराना वित्तीय विवाद… साल 2005 में एतिसलात ने PTCL की 26% हिस्सेदारी 2.6 अरब डॉलर में खरीदी थी… इसमें से लगभग 800 मिलियन डॉलर आज तक रोके हुए हैं… कंपनी का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने समझौते के तहत कुछ संपत्तियों का ट्रांसफर पूरा नहीं किया, इसलिए भुगतान अटका हुआ है… यह विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है।
रणनीति के पीछे की वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ पाकिस्तान की खराब अर्थव्यवस्था से जुड़ा नहीं है… बल्कि यूएई की नई वैश्विक निवेश रणनीति का हिस्सा है।दुनिया में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और पूंजी को ज्यादा सुरक्षित जगहों पर लगाने की नीति—इन कारणों से खाड़ी निवेशक अपने पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। यूएई अब “स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी” के तहत आक्रामक आर्थिक फैसले ले रहा है। और उसी दिशा में यह कदम भी देखा जा रहा है।
पाकिस्तान पर संभावित असर
अगर e& वास्तव में PTCL से बाहर निकलती है, तो यह पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका होगा… टेलीकॉम सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था का अहम स्तंभ हैऐसे में एक बड़े विदेशी निवेशक का जाना निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है…
हालांकि, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह सऊदी अरब (Saudi Arabia) और कतर (Qatar) जैसे देशों से नया निवेश आकर्षित करने की कोशिश करेगी। कर्ज वापसी और निवेश समेटने जैसे फैसले साफ संकेत दे रहे हैं कि पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां और गहराने वाली हैं। अब नजर इस पर रहेगी कि क्या पाकिस्तान नए निवेशकों को आकर्षित कर पाता है या संकट और बढ़ता है।
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