
नई दिल्ली। Idyllwild की पहाड़ियों (Hills) में बसा यह छोटा सा कस्बा (Town) अपनी एक ऐसी परंपरा (Tradition) के लिए जाना जाता है, जो दुनिया के किसी भी अन्य शहर से बिल्कुल अलग है। यहां शहर का “मेयर” कोई इंसान नहीं होता, बल्कि एक कुत्ता (Dog) चुना जाता है, जिसे लोग प्यार और सम्मान से “डॉग मेयर” कहते हैं। यह व्यवस्था सुनने में भले ही अनोखी लगे, लेकिन यहां के लोगों के लिए यह एक भावनात्मक और सामुदायिक (Community) जुड़ाव का प्रतीक बन चुकी है।
इस परंपरा की शुरुआत एक चैरिटी पहल के तौर पर हुई थी, जहां लोगों से अपने पसंदीदा कुत्ते के लिए दान करने को कहा गया था। यह दान ही असल में वोट का काम करता है। जिस कुत्ते के नाम सबसे ज्यादा दान इकट्ठा होता है, उसे शहर का मानद मेयर घोषित कर दिया जाता है। यह चुनाव पूरी तरह प्रतीकात्मक होता है और इसका उद्देश्य सामाजिक कार्यों के लिए फंड जुटाना होता है।
समय के साथ यह विचार एक नियमित परंपरा में बदल गया। हर साल यहां चुनाव जैसा माहौल बनता है, जहां अलग-अलग कुत्ते “उम्मीदवार” के रूप में सामने आते हैं। लोग अपने पसंदीदा कुत्ते के लिए दान करते हैं और इसी आधार पर विजेता तय होता है। यह पूरी प्रक्रिया न सिर्फ मजेदार होती है, बल्कि इसमें समुदाय की भागीदारी भी बढ़ती है।
चुने गए कुत्ते को कोई राजनीतिक अधिकार नहीं मिलता, लेकिन उसे शहर का प्रतीक मानकर सम्मान दिया जाता है। वह स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेता है, लोगों के साथ फोटो खिंचवाता है और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन जाता है। बच्चे और बड़े सभी उसे देखने और मिलने के लिए उत्साहित रहते हैं।
यह परंपरा धीरे-धीरे एक स्थानीय पहल से बढ़कर एक अंतरराष्ट्रीय आकर्षण बन गई है। हर साल हजारों लोग इस छोटे से कस्बे में आते हैं ताकि इस अनोखी प्रक्रिया को देख सकें। यहां “नेता” का मतलब सत्ता नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रतीक है जो लोगों को जोड़ता है और समुदाय में खुशी फैलाता है।
इडलीवाइल्ड का यह अनोखा सिस्टम इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक छोटा सा विचार भी किसी शहर की पहचान बन सकता है। यहां राजनीति की जगह प्यार, दान और समुदाय की भावना सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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