
नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artifical Intelligence) आज के दौर में इंसानों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का एक अहम हिस्सा बन चुका है। कई मामलों में लोग AI को एक सिर्फ असिस्टेंट (Assistant) की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी निर्भर हो गए हैं। इस स्थिति को देखकर AI के गॉडफादर भी दुखी हैं। AI के गॉडफादर के नाम से मशहूर कंप्यूटर साइंटिस्ट जेफ्री हिंटन (Computer scientist Geoffrey Hinton) ने एक इंटरव्यू में बताया है कि वे इस टेक्नोलॉजी को लेकर बेहद दुखी हैं और उनके मुताबिक दुनिया इसके बढ़ते खतरों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
हिंटन ने इंटरव्यू में कहा है कि आने वाले दिनों में AI के बेहद खतरनाक रूप नजर आएगा। उन्होंने कहा, “मुझे बहुत दुख होता है कि मैंने अपनी जिंदगी इस चीज को डेवलप करने में लगा दी और अब यह बहुत खतरनाक हो गई है और लोग इसके खतरों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।”
न्यूरल नेटवर्क को बनाने में की थी मदद
गौरतलब है कि हिंटन में मॉडर्न आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार, न्यूरल नेटवर्क को बनाने में मदद की थी। हालांकि अब वह इसके सबसे मुखर आलोचकों में से एक बन गए हैं। उन्होंने आगाह किया है कि AI बड़े पैमाने पर नौकरियों के नुकसान पहुंचाने के साथ साथ, समाज में अशांति भी पैदा कई सकता है। जेफ्री के मुताबिक अंत में AI इंसानों से भी ज्यादा बुद्धिमान हो जाएगा।
20 सालों में यह…
हिंटन ने इंटरव्यू में कहा कि मानवता एक अहम मोड़ पर पहुंच रही है और रिसर्चर्स इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान मशीनें बनाने के करीब पहुंच गए हैं। हिंटन ने कहा, “हम पहले कभी ऐसी स्थिति में नहीं रहे हैं कि हम खुद से ज्यादा बुद्धिमान चीजें बना सकें। कई विशेषज्ञों का मानना है कि AI अगले 20 सालों में इंसानी बुद्धिमत्ता को पार कर जाएगा और कई क्षेत्रों में, ऐसा पहले ही हो चुका है। एक बार ऐसा होने के बाद, ऐसे सिस्टम को कंट्रोल करना कई लोगों की सोच से कहीं ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
अब भी आशावादी है हिंटन
हिंटन ने कहा कि इंसानों को इस पर तुरंत ध्यान देने और ज्यादा से ज्यादा रिसर्च करने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम उन्हें ऐसा बना देते हैं कि उन्हें हमारी परवाह ना हो, तो वे शायद हमें खत्म कर देंगे।” हालांकि अपनी चिंताओं के बावजूद हिंटन ने कहा ह कि वह AI पर अपने काम को जारी रखेंगे।उन्होंने कहा, “यह मेरे बिना भी डेवलप हो जाता।” वह शिक्षा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में AI की क्षमता को लेकर आशावादी हैं।
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